जमीन रजिस्ट्री संबंधी जनहित याचिका की एसएलपी खारिज, याचिकाकर्ता पर कुल 75 हजार रुपये हर्जाना

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली शिवशंकर शर्मा की एसएलपी खारिज कर दी। अदालत ने 25 हजार रुपये का अतिरिक्त हर्जाना लगाया है।

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सुप्रीम कोर्ट में झारखंड से जुड़े जमीन रजिस्ट्री मामले की एसएलपी पर आदेश

रांची से जुड़े सरकारी जमीन की कथित अवैध बंदोबस्ती और रजिस्ट्री के मामले में दायर जनहित याचिका पर याचिकाकर्ता शिवशंकर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल उनकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज करते हुए 25 हजार रुपये का अतिरिक्त हर्जाना लगाया है।

इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया था और याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया था। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद दोनों अदालतों की ओर से लगाई गई कुल राशि 75 हजार रुपये हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त 25 हजार रुपये चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन में जमा करने का निर्देश दिया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत का रुख किया था।

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि अंचल अधिकारियों और रजिस्ट्रार ने कथित साजिश के तहत सरकारी जमीन की गलत बंदोबस्ती और रजिस्ट्री की। याचिकाकर्ता ने इससे सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये के नुकसान का दावा करते हुए जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। ये आरोप अदालत में प्रमाणित तथ्य के रूप में स्थापित नहीं हुए।

याचिका में गैरमजरुआ खास, गैरमजरुआ मालिक, प्रतिबंधित भूमि और छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम के दायरे वाली जमीनों से जुड़ी कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। रांची जिले के नामकुम, हेहल, ओरमांझी और रांची सदर के अलावा चास, गिरिडीह सदर, चंदनकियारी, सरिया तथा खूंटी के अधिकारियों के विरुद्ध भी जांच की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया था कि लगाए गए आरोपों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इसी आधार पर उसने याचिका खारिज कर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया था। अब सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी खारिज होने के साथ हाईकोर्ट के उस आदेश से याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं मिली है।