जसीडीह बाईपास रेल लाइन को सुरक्षा मंजूरी, परिचालन शुरू होने का रास्ता साफ

देवघर लिंक केबिन और कुमराबाद रोहिणी स्टेशन को जोड़ने वाली 4.905 किलोमीटर लंबी जसीडीह बाईपास रेल लाइन को सीआरएस की मंजूरी मिल गई है।

2 मिनट पढ़ें 8 बार पढ़ी गई
देवघर की जसीडीह बाईपास ब्रॉड गेज रेल लाइन का सांकेतिक दृश्य

देवघर जिले में निर्मित जसीडीह बाईपास ब्रॉड गेज रेल लाइन को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही 4.905 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर ट्रेनों का परिचालन शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। परियोजना देवघर लिंक केबिन को कुमराबाद रोहिणी स्टेशन से सीधे जोड़ती है और इसकी लागत 293.67 करोड़ रुपये बताई गई है।

नई लाइन का उद्देश्य जसीडीह में ट्रेनों के इंजन को विपरीत दिशा में लगाने की प्रक्रिया से बचाना है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बाईपास के उपयोग से यात्रा में करीब 35 से 45 मिनट की बचत हो सकती है। इससे देवघर और संथाल परगना क्षेत्र में ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होने की उम्मीद है।

रेल सुरक्षा आयुक्त गुरु प्रकाश ने अपनी टीम के साथ कुमराबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन तक बने पूरे रेलखंड का निरीक्षण किया। टीम ने मोटर ट्रॉली से पटरियों का जायजा लिया और लिंक केबिन के पास गेज की माप भी कराई। इसके बाद इस खंड पर स्पीड ट्रायल किया गया, जिसे सफल बताया गया है।

निरीक्षण के दौरान पूर्व रेलवे के मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी (कंस्ट्रक्शन) मनोज खान, डीआरएम संघर्ष मौर्य और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सीआरएस की औपचारिक रिपोर्ट मिलने के बाद सितंबर के अंत तक नियमित ट्रेनों का संचालन शुरू करने की तैयारी है। वास्तविक शुरुआत औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी।

इस परियोजना के निर्माण के दौरान करीब 300 पेड़ काटे गए थे। इसकी भरपाई के लिए रेलवे ने राज्य सरकार को पांच गुना अधिक पौधारोपण के उद्देश्य से राशि दी है। रेलवे की ओर से भी लगभग 1,500 नए पौधे लगाने की प्रक्रिया चलने की जानकारी दी गई है।

बाईपास चालू होने के बाद जसीडीह होकर गुजरने वाली संबंधित ट्रेनों को इंजन रिवर्सल की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे स्टेशन पर लगने वाला अतिरिक्त समय घटने और रेल संचालन की गति बेहतर होने की संभावना है। यह रेलखंड देवघर तथा संथाल परगना के यात्रियों के लिए क्षेत्रीय संपर्क सुधारने वाली महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है।