जसीडीह सीएचसी में सभी डिजिटल स्वास्थ्य मॉड्यूल लागू, मरीजों का रिकॉर्ड ऑनलाइन

देवघर के जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण, जांच, दवा और डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन समेत मरीज से जुड़ी प्रक्रियाओं का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।

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देवघर का जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जहां डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हैं

देवघर जिले के जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के पंजीकरण से लेकर इलाज पूरा होने तक की प्रक्रियाओं को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा गया है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के निर्धारित मानकों पर पूरी तरह काम करने वाला यह झारखंड का पहला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है।

केंद्र में अस्पताल प्रबंधन के लिए तैयार सी-डैक एचएमआईएस सॉफ्टवेयर के सभी मॉड्यूल लागू किए गए हैं। इसके माध्यम से ओपीडी, प्रयोगशाला, फार्मेसी और चिकित्सकों के डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन सहित मरीजों से संबंधित अलग-अलग सेवाओं एवं रिकॉर्ड का संचालन किया जा रहा है। इससे अस्पताल आने से लेकर उपचार के बाद लौटने तक की जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज होती है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. विश्वनाथ चौधरी के अनुसार, व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। तकनीकी परेशानी सामने आने पर राज्य स्तर के विशेषज्ञों से सहयोग लिया गया। कर्मचारियों को सॉफ्टवेयर के विभिन्न मॉड्यूल और तय प्रक्रियाओं के इस्तेमाल की जानकारी भी लगातार दी गई।

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि जसीडीह सीएचसी में ‘स्कैन एंड शेयर’ का रिकॉर्ड 100 प्रतिशत है। तुलना में देवघर सदर अस्पताल की हिस्सेदारी करीब 83 प्रतिशत और मधुपुर अनुमंडल अस्पताल की करीब 35 प्रतिशत बताई गई है। ये आंकड़े अस्पताल प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराए गए हैं।

डिजिटल प्रणाली से मरीजों के पुराने स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक पहुंच भी आसान हुई है। आभा से जुड़े सीआरएन नंबर के माध्यम से चिकित्सक मरीज की पूर्व चिकित्सा जानकारी देख सकते हैं। अस्पताल की चिकित्सक डॉ. सिंकी सिन्हा के मुताबिक, इससे ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को हर बार पुरानी पर्चियां साथ लाने की जरूरत कम होती है और डॉक्टर को पिछला विवरण समझने में सुविधा मिलती है।

अस्पताल आने वाले मरीज आदित्य कुमार ने डिजिटल व्यवस्था के बाद पंजीकरण और दूसरी प्रक्रियाओं में सुविधा मिलने तथा कतार में लगने का समय घटने की बात कही। प्रबंधन के अनुसार, सभी सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से डिजिटल प्रणाली से जोड़ा गया और कर्मचारियों ने विभिन्न मॉड्यूल का अध्ययन कर उन्हें कामकाज में लागू किया।