बदलते मौसम में बकरी के नवजात बच्चों को संक्रमण से बचाने की सलाह

धनबाद में पशुपालन विभाग ने बकरी पालकों से नवजात बच्चों को ठंड, नमी और गंदगी से बचाने तथा साफ, सूखे और हवादार बाड़े में रखने को कहा है।

2 मिनट पढ़ें 9 बार पढ़ी गई
झारखंड24 का पूर्ण लोगो—प्रकाशक की लोगो-मात्र छवि के स्थान पर

धनबाद में बदलते मौसम के दौरान बकरी के नवजात बच्चों में बीमारी और संक्रमण का खतरा बढ़ने को लेकर पशुपालन विभाग ने पालकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार जन्म के बाद शुरुआती दिनों में बच्चों की विशेष देखभाल जरूरी है, क्योंकि इस अवधि में मौसम और बाड़े की स्थिति का उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

विभाग ने बताया है कि शुरुआती दिनों में बकरी के बच्चों को निमोनिया का खतरा सबसे अधिक रहता है। ठंड, नमी और गंदगी के बीच रखे जाने पर बच्चे बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए पालकों से मौसम में हो रहे बदलाव को देखते हुए रहने की जगह और सफाई पर लगातार ध्यान देने को कहा गया है।

सलाह के मुताबिक नवजात बच्चों को साफ, सूखे और हवादार बाड़े में रखा जाना चाहिए। बाड़े में बारिश का पानी या किसी अन्य वजह से नमी जमा नहीं होने देनी चाहिए। इससे बच्चों को ठंड और गंदगी से बचाने में मदद मिलेगी तथा संक्रमण का जोखिम भी कम किया जा सकेगा।

रात के समय ठंड बढ़ने की स्थिति में बकरी के बच्चों को ठंडी हवा से बचाने की उचित व्यवस्था करने को कहा गया है। साथ ही यह ध्यान रखना जरूरी बताया गया है कि हवा से बचाव करते समय बाड़ा हवादार भी बना रहे। विभाग ने नवजात बच्चों के आसपास की जगह सूखी रखने पर विशेष जोर दिया है।

बकरी पालकों को बाड़े की नियमित सफाई करने और जमा गंदगी तथा गोबर को समय-समय पर हटाने की भी सलाह दी गई है। विभाग के अनुसार निमोनिया से बचाव के बाद भी बच्चों में दूसरे संक्रमण का खतरा बना रह सकता है, इसलिए केवल शुरुआती सावधानी के बाद देखभाल में ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए।

पशुपालन विभाग ने नवजात बच्चों को उनकी मां का पहला दूध समय पर पिलाने को भी जरूरी बताया है। पालकों से कहा गया है कि जन्म के बाद देखभाल, साफ-सफाई, सूखा बाड़ा, ठंडी हवा से सुरक्षा और समय पर पहला दूध सुनिश्चित कर मौसमी बीमारी के खतरे को कम करने का प्रयास करें।