जामताड़ा के जिला उद्यान कार्यालय में सोमवार को किसानों के लिए तीन दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण शुरू हुआ। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की उद्यान विकास योजना के तहत आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक ढंग से मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन की जानकारी देना है। प्रशिक्षण दो से चार नवंबर तक चलेगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कृषि पदाधिकारी अनूप कुमार हेंब्रम ने किया। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के सहयोग से हो रहे इस प्रशिक्षण में किसानों को बताया जा रहा है कि खेती के साथ मधुमक्खी पालन को अतिरिक्त व्यवसाय के रूप में कैसे अपनाया जा सकता है। सीमित जमीन और संसाधनों में भी इसे स्वरोजगार के विकल्प के तौर पर विकसित किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान मधुमक्खियों के लिए उपयुक्त स्थान चुनने, बॉक्स लगाने, कॉलोनी का रखरखाव करने और रानी मधुमक्खी की भूमिका समझने से जुड़ी जानकारी दी जा रही है। किसानों को मौसम के अनुसार देखभाल और सुरक्षित तरीके से शहद निकालने की प्रक्रिया भी समझाई जा रही है।
कार्यक्रम में मधुमक्खियों की सुरक्षा, रोग एवं कीट प्रबंधन, शहद के संग्रहण और विपणन से जुड़े विषय भी शामिल किए गए हैं। कृषि पदाधिकारी ने प्रशिक्षण को जरूरी बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक जानकारी के साथ व्यवसाय शुरू करने से किसानों को संचालन समझने और नुकसान की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।
मधुमक्खी पालन से शहद के साथ मोम भी प्राप्त होता है। इसके अलावा मधुमक्खियां फसलों और फलदार पौधों में परागण की प्रक्रिया को बढ़ाने में भूमिका निभाती हैं। प्रशिक्षण में किसानों को बताया गया कि इससे फसल उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार की संभावना रहती है।
तीन दिनों के कार्यक्रम में तकनीकी जानकारी के साथ मधुमक्खी पालन के व्यावसायिक पक्ष पर भी ध्यान दिया जाएगा। आयोजन के शुभारंभ के दौरान इंदु शेखर पोद्दार, देव कुमार और बीटीएम गंगाधर मंडल सहित संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद थे।