रांची से मिली जानकारी के अनुसार, झारखंड सरकार 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में राज्य के राजस्व और कर अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाएगी। राज्य की ओर से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर बैठक में शामिल होंगे। बैठक भारत मंडपम में सुबह 11 बजे शुरू होनी है और इसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के मुताबिक, परिषद के सामने जीएसटी व्यवस्था में बदलाव के बाद राज्य की आय में आई गिरावट और मुआवजे का विषय रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी सरलीकरण से राज्यों पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव पर भी चर्चा की जरूरत है। उनका दावा है कि विभिन्न नीतिगत बदलावों से झारखंड को 20 से 22 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है।
राज्य सरकार वैट से जुड़े अधिकारों का प्रश्न भी बैठक में उठाना चाहती है। वित्त मंत्री ने कहा कि वैट से राज्य को मिलने वाली राशि और उस पर कर लगाने के अधिकार के बारे में झारखंड अपना पक्ष रखेगा। जीएसटी प्रक्रियाओं में सुधार बैठक के प्रमुख विषयों में रहने की संभावना बताई गई है।
वित्त मंत्री ने खनिज और भूमि से जुड़े अधिकारों के संदर्भ में एमएमडीआर कानून में बदलाव पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित प्रावधानों से राज्य के अधिकार सीमित हो सकते हैं। यह झारखंड सरकार का पक्ष है, जिसे परिषद की बैठक में केंद्र और अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों के सामने रखने की तैयारी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में झारखंड का वास्तविक एसजीएसटी संग्रह 13,980 करोड़ रुपये रहा था। राज्य सरकार ने 2026-27 के लिए 14,564 करोड़ रुपये का एसजीएसटी बजट लक्ष्य निर्धारित किया है। चार वर्षों में जीएसटी संग्रह 76 प्रतिशत बढ़ने की बात कही गई है।
इसी अवधि में जीएसटी मुआवजे में बड़ी कमी दर्ज होने का दावा भी किया गया है। वित्त वर्ष 2021-22 में झारखंड को 1,526 करोड़ रुपये मुआवजा मिला था, जबकि 2024-25 में यह राशि 36 करोड़ रुपये बताई गई है। राज्य सरकार बैठक में इन आंकड़ों के आधार पर मुआवजे और राजस्व हिस्सेदारी का विषय रखेगी।