रांची में जेएसएससी संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीआईडी ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के रूप में कार्यरत भानु प्रताप और दुकान संचालक सुमित कुमार सिंह शामिल हैं। दोनों को शुक्रवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सीआईडी के अनुसार, भानु प्रताप रांची के बरियातू थाना क्षेत्र के टैगोर हिल रोड स्थित रविंद्र नगर का निवासी है। वह जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में सफल होने के बाद सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था। दूसरा आरोपी सुमित कुमार सिंह हटिया के टोंको रोड स्थित केशव विहार सिंह मेंशन का निवासी बताया गया है और किराना व फोटोकॉपी की दुकान चलाता था।
दोनों को सीआईडी थाना में एक जनवरी 2025 को दर्ज कांड संख्या 01/2025 के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी ने इन्हें अप्राथमिकी आरोपी बताया है। सीआईडी का कहना है कि दोनों परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स आईसीएन टेक्नोलॉजी के संचालक मिथिलेश सिंह के रिश्तेदार हैं। मिथिलेश सिंह अभी फरार बताया गया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि भानु प्रताप और सुमित कुमार सिंह ने 10 से 12 अभ्यर्थियों को नकल कराकर परीक्षा पास कराने में भूमिका निभाई। सीआईडी के दावे के मुताबिक, भानु प्रताप स्वयं भी इस परीक्षा में सफल हुआ था। ये आरोप जांच का हिस्सा हैं और मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगा।
इस प्रकरण में एजेंसी पहले मिथिलेश सिंह के एक अन्य रिश्तेदार रितेश कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वह मूल रूप से बिहार के भोजपुर का रहने वाला और वर्तमान में बोकारो के दुग्धा में रह रहा था। मामले में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने, उसे रटवाने और नकल कराने के आरोपों में दो दर्जन से अधिक एजेंटों तथा बिचौलियों की गिरफ्तारी की बात भी कही गई है।
सीआईडी के मुताबिक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं के माध्यम से सीटों के बदले बड़ी रकम लिए जाने और अयोग्य अभ्यर्थियों को सफल कराने के आरोपों की जांच चल रही है। परीक्षा पास करने के बाद नौकरी कर रहे कई अभ्यर्थी भी फिलहाल रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद बताए गए हैं।