रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) के निबंधन और उपनियमों से जुड़े मामले की सुनवाई की। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने राज्य सरकार को मुख्य रिट याचिका और संबंधित इंटरलोक्यूटरी आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। अदालत ने फिलहाल जेएससीए के निबंधन की वैधता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है।
डब्ल्यूपी (सी) संख्या 5617/2026 की यह याचिका राजेश सिंह ने 15 जून 2026 को दाखिल की थी। इसमें राज्य सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सहित अन्य संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने यह स्पष्ट करने का निर्देश देने की मांग की है कि जेएससीए कथित रूप से पंजीकृत उपनियमों के बिना किस आधार पर काम कर रहा है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 18 जुलाई 2016, 21 अक्टूबर 2016 और 9 अगस्त 2018 के आदेशों का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की किसी राज्य इकाई को संशोधित उपनियमों का निबंधन कराए बिना काम नहीं करना चाहिए। ये दावे अभी न्यायिक विचाराधीन हैं और अदालत ने इन पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
मामले में याचिकाकर्ता ने 3 अक्टूबर 2026 को आईए संख्या 14459/2026 भी दाखिल किया। इसके जरिये 14 अगस्त 2026 को जारी निबंधन प्रमाणपत्र को चुनौती दी गई है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जेएससीए द्वारा 9 अक्टूबर 2018 को दिए गए आवेदन को निर्धारित 90 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद पिछली तारीख से अनुमति दी गई।
राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अपर महाधिवक्ता-तृतीय आशुतोष आनंद ने आवेदन अपनाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उनका पक्ष था कि प्रमाणपत्र को चुनौती देने के लिए रिट याचिका में संशोधन का उचित आवेदन दाखिल किया जाना चाहिए था। उन्होंने मुख्य याचिका और इंटरलोक्यूटरी आवेदन पर जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
अदालत ने प्रतिवादी संख्या तीन और चार को स्पीड पोस्ट से नोटिस जारी करने का निर्देश भी दिया है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज 28 अक्टूबर 2026 तक दाखिल करने होंगे। संबंधित प्रतिवादी इस अवधि में जवाबी हलफनामा दे सकते हैं। मामले को छह सप्ताह बाद उपयुक्त श्रेणी में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।