जेपीएससी में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली, परीक्षाओं व शिक्षक प्रोन्नति पर असर

अध्यक्ष और सभी सदस्यों के पद करीब तीन महीने से खाली रहने के कारण जेपीएससी की कई परीक्षाएं और विश्वविद्यालय शिक्षकों की प्रोन्नति प्रक्रिया लंबित है।

2 मिनट पढ़ें 7 बार पढ़ी गई
रांची स्थित झारखंड लोक सेवा आयोग कार्यालय का दृश्य

रांची स्थित झारखंड लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और सभी सदस्यों के पद करीब तीन महीने से खाली रहने के कारण महत्वपूर्ण कामकाज प्रभावित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आयोग से जुड़ी कई प्रतियोगी परीक्षाएं और विश्वविद्यालय शिक्षकों की प्रोन्नति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन निर्णय लेने वाले पद रिक्त होने से नियमित गतिविधियां ठप बताई जा रही हैं।

झारखंड हाई कोर्ट ने 10 सितंबर को राज्य सरकार को दो महीने के भीतर अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था। नियुक्तियां नहीं होने के बाद अदालत ने सरकार से 18 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को निर्धारित है।

आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने सीआईडी जांच के सिलसिले में 22 जुलाई को इस्तीफा दिया था। इसके बाद सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने भी 9 अगस्त को अपने पद छोड़ दिए थे। तब से अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने की बात सामने आई है।

रिक्तियों का असर राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की प्रोन्नति पर भी पड़ा है। स्टेज वन से स्टेज टू तक करीब 100 शिक्षकों की प्रोन्नति लंबित बताई गई है। इनमें लगभग 60 शिक्षक ऐसे हैं जिनके मामले सीबीआई जांच के दायरे में हैं। वर्ष 2008 बैच के कई सहायक प्राध्यापक भी अपनी पहली प्रोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

परीक्षा संबंधी गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक पहले नौ परीक्षाएं स्थगित की गई थीं, जबकि 21 अन्य परीक्षाओं के रद्द होने से 30 से अधिक प्रक्रियाएं अधर में हैं। इनमें संयुक्त सिविल सेवा की नियमित और बैकलॉग परीक्षाओं के साथ सिविल जज, सहायक लोक अभियोजक, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, प्रोजेक्ट मैनेजर, बॉयलर इंस्पेक्टर और झारखंड पात्रता परीक्षा शामिल हैं।

सरकार ने इन परीक्षाओं की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने की घोषणा की थी, लेकिन उसका गठन अभी तक नहीं हो सका है। प्रोन्नति में देरी का प्रभाव शिक्षकों के वेतन, बकाया वित्तीय लाभ और वरिष्ठ शैक्षणिक पदों की पात्रता पर भी पड़ने की बात कही गई है। अब नियुक्तियों और अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल होने पर आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी।