झरिया पुनर्वास के संशोधित मास्टर प्लान में मॉडल टाउनशिप और आजीविका पर जोर

अग्नि और भू-धंसान प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए संशोधित योजना पर काम जारी है। प्रस्ताव में मॉडल टाउनशिप, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर दिया गया है।

2 मिनट पढ़ें 3 बार पढ़ी गई
झरिया के अग्नि और भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास की प्रतीकात्मक तस्वीर

धनबाद के झरिया में अग्नि और भू-धंसान से प्रभावित इलाकों के पुनर्वास के लिए संशोधित मास्टर प्लान पर काम किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कोयला मंत्रालय की टीम स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर योजना को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें सुरक्षित आवास के साथ विस्थापित परिवारों की आजीविका को भी प्रमुखता देने की बात कही गई है।

झरिया पुनर्वास विकास प्राधिकार के कौशल विकास एवं आजीविका विभाग के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जितेंद्र मल्लिक ने बताया कि प्रभावित परिवारों के लिए विकसित की जा रही टाउनशिप को मॉडल टाउन के रूप में आकार देने की योजना है। पुनर्वास के बाद परिवारों के सामने रोजगार का संकट न आए, इसके लिए कौशल विकास केंद्र स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर काम के अवसर तैयार करने पर जोर है।

योजना के तहत टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम चलने की जानकारी दी गई है। मल्लिक के मुताबिक, बेलगड़िया में पोल्ट्री और डेयरी फार्मिंग, बहु-कौशल प्रशिक्षण तथा नि:शुल्क कोचिंग जैसी गतिविधियां शुरू करने में सहयोग किया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य पुनर्वास को केवल मकान उपलब्ध कराने तक सीमित न रखकर आय के स्थायी साधनों से जोड़ना है।

कौशल और आजीविका संबंधी कार्यक्रमों के लिए टाटा स्टील फाउंडेशन के साथ समझौता किया गया है। वहीं, मशरूम की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए आईसीएआर-रांची के साथ समझौते पर जल्द हस्ताक्षर होने की बात कही गई है। ये प्रस्ताव प्रभावित परिवारों के लिए खेती से इतर आय के विकल्प तैयार करने की व्यापक योजना का हिस्सा बताए गए हैं।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, झरिया के अग्नि प्रभावित क्षेत्र में 595 स्थानों को खतरनाक घोषित किया गया है। इनमें 81 इलाके अति संवेदनशील श्रेणी में बताए गए हैं। संशोधित मास्टर प्लान के तहत करीब 15 हजार परिवारों के पुनर्वास का लक्ष्य रखा गया है और इस प्रक्रिया को वर्ष 2028 तक पूरा करने की बात है।

झरिया में भूमिगत आग और भू-धंसान के जोखिम को देखते हुए सुरक्षित स्थानांतरण योजना की मुख्य चुनौती है। मॉडल टाउनशिप, प्रशिक्षण और आजीविका कार्यक्रमों के प्रस्ताव इसीलिए एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव उनके समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रभावित परिवारों तक सुविधाएं पहुंचने के बाद ही स्पष्ट होगा।