झारखंड का ऋण-जमा अनुपात पांच साल में बढ़कर 54.97 प्रतिशत, विकसित राज्यों से अब भी पीछे

जून 2021 से जून 2026 के बीच झारखंड में बैंक जमा और वितरित ऋण दोनों बढ़े। ऋण-जमा अनुपात 37.04 से बढ़कर 54.97 प्रतिशत हुआ, लेकिन अंतर अब भी बना हुआ है।

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झारखंड में बैंक जमा और वितरित ऋण के अनुपात को दर्शाती सांकेतिक बैंकिंग तस्वीर

रांची। झारखंड में बैंकों का ऋण-जमा अनुपात बीते पांच वर्षों में सुधरा है, लेकिन यह अब भी विकसित राज्यों के मुकाबले कम बताया गया है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून 2021 में यह अनुपात 37.04 प्रतिशत था, जो जून 2026 तक बढ़कर 54.97 प्रतिशत हो गया।

ऋण-जमा अनुपात से पता चलता है कि बैंकों के पास जमा कुल राशि के मुकाबले कितना धन कर्ज के रूप में दिया गया। इसका प्रतिशत कुल वितरित ऋण को कुल जमा से भाग देकर निकाला जाता है। ऊंचा अनुपात बैंकिंग संसाधनों के अधिक हिस्से के कर्ज के रूप में इस्तेमाल होने का संकेत देता है।

आंकड़ों के मुताबिक जून 2021 से जून 2026 के बीच राज्य के बैंकों में जमा राशि 2.61 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 4.05 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसी अवधि में वितरित ऋण 96,642 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.23 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा। जमा की तुलना में ऋण की तेज वृद्धि से अनुपात में सुधार दर्ज किया गया।

झारखंड की मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े दूसरे आंकड़ों में कुल जमा राशि 4,04,461 करोड़ रुपये और कुल अग्रिम 2,17,517 करोड़ रुपये बताए गए हैं। इस आधार पर ऋण-जमा अनुपात 53.78 प्रतिशत दर्ज है। राज्य में कुल 3,506 बैंक शाखाएं और 3,365 एटीएम होने की जानकारी भी दी गई है।

रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक के मानक के रूप में 60 से 75 प्रतिशत की सीमा का उल्लेख किया गया है। इस तुलना में राज्य का अनुपात अभी निचले स्तर पर है। राज्य सरकार की ओर से बैंकों को जमा राशि के अनुपात में अधिक लोगों तक ऋण सुविधा पहुंचाने पर ध्यान देने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अनुपात में लगातार बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए बैंकों से इस दिशा में और काम करने को कहा है। व्यापार जगत की ओर से भी जमा धन के अनुरूप ऋण उपलब्ध नहीं होने पर चिंता जताई गई है तथा सरकार और बैंकों के बीच निरंतर समन्वय को जरूरी बताया गया है।