रांची से गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों तक पहुंचाने वाली झारखंड सरकार की एयर एंबुलेंस सेवा छह महीने से अधिक समय से बंद है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सेवा बहाल करने से जुड़ी फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में अनुमोदन के लिए भेजी गई है, लेकिन इसके दोबारा शुरू होने की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।
सरकारी सेवा 23 फरवरी 2026 को चतरा में हुए विमान हादसे के बाद बंद की गई थी। रांची से दिल्ली जा रहे बीचक्राफ्ट किंग एयर सी90ए विमान में दो पायलट, दो चिकित्सा कर्मी, एक मरीज और दो अटेंडेंट सवार थे। हादसे में विमान में मौजूद सभी सात लोगों की मौत हो गई थी।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की प्रारंभिक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि उड़ान भरने के करीब 17 मिनट बाद खराब मौसम के बीच विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। हादसे के बाद सुरक्षा और जांच से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान सरकारी एयर एंबुलेंस का संचालन रोक दिया गया। सेवा की बहाली के संबंध में अभी आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है।
सरकारी विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों के परिजनों को निजी एयर एंबुलेंस कंपनियों से संपर्क करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, रांची से दिल्ली का निजी किराया पहले करीब 6.5 लाख रुपये था, जो अब 13 लाख रुपये तक पहुंच गया है। सरकारी सेवा लगभग 55 हजार रुपये प्रति घंटे की दर से उपलब्ध कराई जाती थी।
अन्य शहरों के लिए भी अधिक खर्च की जानकारी दी गई है। रांची से मुंबई का किराया पहले 11 से 12 लाख रुपये बताया गया था, जो अब 16 से 17 लाख रुपये तक है। चेन्नई और वेल्लोर के लिए खर्च 12-13 लाख रुपये से बढ़कर 17-18 लाख रुपये तक पहुंचने तथा हैदराबाद के लिए 15-16 लाख रुपये तक लगने की बात सामने आई है।
रांची से हर महीने औसतन 15 एयर एंबुलेंस उड़ानें संचालित होने की जानकारी है। इनके जरिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में ले जाया जाता है। ऐसे में सरकारी सेवा का बंद रहना उन परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा कर रहा है जिन्हें गंभीर मरीज को तत्काल बड़े अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।