झारखंड के कई खेल प्रशिक्षण केंद्रों में नियमित कोच की कमी सामने आई है। रांची स्थित उत्कृष्टता हॉकी केंद्र समेत अलग-अलग जिलों के एक दर्जन से अधिक केंद्रों में प्रशिक्षण व्यवस्था कहीं अतिरिक्त प्रभार तो कहीं डे-बोर्डिंग प्रशिक्षकों के सहारे चल रही है। इससे खिलाड़ियों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन देने की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
रांची के उत्कृष्टता हॉकी केंद्र में नियमित कोच नहीं है और फिलहाल जिम्मेदारी प्रभार के आधार पर संभाली जा रही है। उत्कृष्टता बैडमिंटन केंद्र में भी आवासीय कोच को अतिरिक्त दायित्व दिया गया है। दुमका के उत्कृष्टता तीरंदाजी केंद्र के कोच सुमित के पास तीन केंद्रों का प्रभार होने की जानकारी दी गई है।
गुमला, देवघर, सरायकेला-खरसावां, दुमका और चक्रधरपुर के कई आवासीय फुटबॉल केंद्रों में भी वैकल्पिक व्यवस्था से प्रशिक्षण चलने की बात सामने आई है। महुआटांड़ के आवासीय बालिका एथलेटिक्स केंद्र और सिमडेगा के आवासीय बालिका हॉकी केंद्र में कोच उपलब्ध नहीं हैं। सिमडेगा के पांच हॉकी केंद्र दो कोच के भरोसे हैं, जबकि गुमला के दो हॉकी केंद्रों की जिम्मेदारी एक कोच पर है।
आवासीय केंद्रों में खिलाड़ी नियमित अभ्यास करते हैं। ऐसे में प्रशिक्षक की लगातार उपलब्धता तकनीक सुधारने, फिटनेस पर काम करने और प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। एक ही कोच को कई केंद्रों का दायित्व मिलने से प्रत्येक खिलाड़ी की जरूरत और कमियों पर अलग से काम करने की गुंजाइश सीमित हो सकती है।
खेल निदेशालय ने 2024 में हजारीबाग, रामगढ़, गोड्डा, खूंटी, चंदनक्यारी और गढ़वा सहित कई स्थानों पर नए खेल केंद्र शुरू करने की पहल की थी। इनमें बालिका बैडमिंटन, तैराकी, नेटबॉल, हॉकी, फुटबॉल और एथलेटिक्स से जुड़े केंद्र शामिल हैं। कुछ केंद्र अभी शुरू नहीं हुए हैं; कहीं कोच की उपलब्धता तो कहीं प्रशिक्षुओं की चयन प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
पूर्व खिलाड़ियों ने सभी प्रशिक्षण केंद्रों में स्वीकृत पदों के अनुरूप नियमित नियुक्ति करने और एक प्रशिक्षक को कई केंद्रों का प्रभार देने की व्यवस्था सीमित करने की जरूरत बताई है। उनके सुझावों में खेलवार विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और 2024 में बनाए गए केंद्रों की कोचिंग व्यवस्था की समीक्षा करना भी शामिल है।