रांची में झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य के खुले जेलों में बुनियादी सुविधाओं की निगरानी से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद तीन नवंबर तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि झारखंड के चार केंद्रीय कारागारों में ओपन बैरक स्थापित करने की अनुमति कैबिनेट से मिल चुकी है। सरकार ने खुले जेलों के संचालन और उनके विस्तार की प्रगति से संबंधित त्रैमासिक रिपोर्ट पेश करने की बात भी कही है। यह रिपोर्ट निर्धारित समयसीमा के भीतर हाई कोर्ट को दी जानी है।
यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में हाई कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की गई थी। इसके माध्यम से राज्य में संचालित खुले जेलों में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं तथा उनकी कार्यप्रणाली की न्यायिक निगरानी की जा रही है। मौजूदा सुनवाई में अदालत ने सरकार से अब तक की प्रगति का अद्यतन विवरण मांगा है।
मामले की पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने खुले जेल के विस्तार से जुड़ी योजना की जानकारी दी थी। सरकार के अनुसार, हजारीबाग में इस उद्देश्य के लिए 32 एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित की गई है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में निर्माण शुरू होने या पूरा होने की कोई समयसीमा नहीं बताई गई है।
राज्य सरकार ने पहले अदालत को यह भी बताया था कि महिला कैदियों के लिए खुले जेल की विशेष व्यवस्था करने की योजना है। चार केंद्रीय कारागारों में ओपन बैरक की कैबिनेट मंजूरी के बाद आगामी स्टेटस रिपोर्ट से इनके संचालन, विस्तार और उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति अधिक स्पष्ट होने की अपेक्षा है।
अब सरकार को तीन नवंबर तक अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके दो दिन बाद होने वाली सुनवाई में खंडपीठ रिपोर्ट का परीक्षण कर सकती है और खुले जेलों की सुविधाओं तथा प्रस्तावित व्यवस्थाओं की प्रगति पर आगे विचार करेगी।