झारखंड के छह सदर अस्पतालों में डीएनबी पाठ्यक्रम की तैयारी, स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा

स्वास्थ्य विभाग ने छह सदर अस्पतालों में डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी के साथ रखरखाव राशि, मानव संसाधन और आपात सेवाओं की समीक्षा की।

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रांची में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में उपस्थित अधिकारी

रांची में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में झारखंड के सदर अस्पतालों की सेवाएं मजबूत करने और छह अस्पतालों में डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी पर चर्चा हुई। विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा ने चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया।

बैठक में चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. पी. भट्टाचार्य, स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. प्रभात कुमार, जिलों के सिविल सर्जन और विभागीय अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं में आवंटित राशि के उपयोग, अस्पतालों की मानव संसाधन स्थिति, आपातकालीन सेवाओं और डीएनबी पाठ्यक्रम की संभावनाओं की समीक्षा की।

विशेष सचिव ने मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना की पूरी राशि एक सप्ताह के भीतर स्वीकृत करने का निर्देश दिया। मदर टेरेसा एडवांस्ड हेल्थ क्लिनिक से जुड़ी लंबित प्रक्रियाएं भी इसी अवधि में पूरी करने को कहा गया। तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात कही गई है।

आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मियों का पूरा विवरण तैयार कर उनके प्रमाणपत्र संबंधित पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश भी दिया गया। विभाग ने इन कर्मियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था शीघ्र शुरू करने और इसके संचालन के लिए दो चिकित्सकों को नोडल पदाधिकारी नामित करने को कहा है। सभी सिविल सर्जनों को डिजिटल हस्ताक्षर तैयार कराने होंगे।

स्वास्थ्य संस्थानों की पुनर्संरचना के लिए जिलों से पीएचसी, सीएचसी, अनुमंडलीय अस्पतालों और जिला अस्पतालों में स्वीकृत तथा उपलब्ध पदों का ब्योरा मांगा गया है। चिकित्सकों के साथ ग्रेड-3 और ग्रेड-4 कर्मियों की मौजूदा संख्या तथा अतिरिक्त जरूरत की जानकारी शुक्रवार तक देनी है। आवश्यकता के अनुसार आउटसोर्सिंग और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट के माध्यम से नियुक्ति की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।

विभाग ने जिला अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करने के लिए ट्रॉमा सेंटर और आईसीयू की वर्तमान स्थिति, संसाधनों तथा आवश्यक सुविधाओं की रिपोर्ट मांगी है। अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों का आकलन कर जरूरत के अनुसार 10 से 15 प्रतिशत बिस्तर आईसीयू और गंभीर चिकित्सा सेवाओं के लिए निर्धारित करने की दिशा में तैयारी करने को कहा गया है।