रांची से जारी निर्देश के बाद झारखंड के पोल्ट्री फार्मों और हैचरियों में मुर्गियों की चोंच काटने के लिए हॉट ब्लेड के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड ने इस तरीके को पशु क्रूरता से जुड़ा और नियमों का उल्लंघन मानते हुए सभी जिलों में कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
पशुपालन निदेशक सह राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के सचिव राबिन टोप्पो ने सभी जिला पशुपालन पदाधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजा है। इसमें जिलों के अंतर्गत संचालित व्यावसायिक और गैर-व्यावसायिक पोल्ट्री फार्मों के साथ हैचरियों को भी हॉट ब्लेड वाली प्रक्रिया तत्काल बंद करने का निर्देश देने को कहा गया है।
पत्र में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1) का उल्लेख किया गया है। बोर्ड के अनुसार, हॉट ब्लेड से चोंच काटना इस प्रावधान के अनुरूप नहीं है। आदेश की प्रति सभी जिलों के उपायुक्तों को भी भेजी गई है, जो जिला पशु क्रूरता निवारण समिति के सह-अध्यक्ष हैं।
जिला अधिकारियों को निर्देश के अनुपालन में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट जल्द मुख्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके अलावा आम लोगों और पोल्ट्री संचालकों को जागरूक करने के लिए विज्ञापनों तथा प्रचार-प्रसार का सहारा लेने का निर्देश भी दिया गया है।
यह कदम कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग तथा पीपल फॉर एनिमल्स पब्लिक पॉलिसी फाउंडेशन की ट्रस्टी एवं सदस्य सचिव गौरी मौलेखी की ओर से भेजे गए पत्र के बाद उठाया गया है। उस पत्र में मुर्गी पालन के दौरान हॉट ब्लेड से चोंच काटने की पद्धति का मामला अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया था।
निर्देश में पोल्ट्री इकाइयों को अधिक सुरक्षित वैकल्पिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आधुनिक हैचरियों में चूजों के जन्म के पहले दिन इंफ्रा-रेड तकनीक से चोंच के सिरे को हटाने का तरीका इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, पाले जा रहे पक्षियों के मामले में विशेषज्ञ चिकित्सक की निगरानी और एनेस्थीसिया की जरूरत बताई गई है।