झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में 100 विशेषज्ञ चिकित्सकों के समायोजन की प्रक्रिया शुरू, धनबाद से 12 नाम

स्वास्थ्य विभाग ने सहायक प्राध्यापक पद पर समायोजन के लिए 100 चिकित्सकों की सूची जारी की है। धनबाद के 12 डॉक्टरों के दस्तावेज और सेवा विवरण की जांच होगी।

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सरकारी मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों के सहायक प्राध्यापक पद पर समायोजन की प्रक्रिया

झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों को शैक्षणिक संवर्ग में लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने सहायक प्राध्यापक पद पर समायोजन के लिए 100 चिकित्सकों की सूची जारी की है। इनमें धनबाद के 12 विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं। हालांकि, समायोजन अभी अंतिम नहीं है और आवश्यक सत्यापन के बाद ही आगे का निर्णय होगा।

सूची में शामिल चिकित्सक झारखंड स्वास्थ्य सेवा के गैर-अकादमिक विशेषज्ञ चिकित्सा संवर्ग में कार्यरत हैं। उन्होंने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक के शैक्षणिक संवर्ग में जाने का विकल्प दिया है। विभाग अब उनकी पात्रता, सेवा संबंधी अभिलेख और जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच करेगा।

विभाग ने सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों, सिविल सर्जनों और संबंधित अधिकारियों से चिकित्सकों का निगरानी स्वच्छता प्रमाणपत्र निर्धारित प्रारूप में मांगा है। यह जानकारी दो कार्यदिवस के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। दस्तावेज मिलने के बाद विभागीय स्तर पर समायोजन की अगली कार्रवाई की जाएगी।

धनबाद से प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के लिए डॉ. पिंकी रानी, डॉ. अंजना कुमारी, डॉ. संजीव कुमार प्रसाद, डॉ. सुमन कुमारी और डॉ. पूनम सिंह के नाम सूची में हैं। पीडियाट्रिक्स में डॉ. विश्वजीत प्रताप तथा पैथोलॉजी में डॉ. कुमार योगेश और डॉ. शोभा कुमारी को शामिल किया गया है।

स्किन विभाग के लिए डॉ. स्वप्न कुमार मंडल का नाम दिया गया है। सर्जरी विभाग की सूची में डॉ. अली जैद अनवर, डॉ. प्रभात कुमार सिन्हा और डॉ. जितेंद्र कुमार चौधरी शामिल हैं। सूची में शामिल अधिकतर चिकित्सक विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारी के पद पर हैं, जबकि कुछ चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

विभाग के अनुसार इस पहल का उद्देश्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का शैक्षणिक व्यवस्था में उपयोग करना है। निगरानी स्वच्छता प्रमाणपत्र, पात्रता और सेवा विवरण का सत्यापन पूरा होने के बाद ही सहायक प्राध्यापक संवर्ग में समायोजन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।