झारखंड में बेसहारा, दुर्घटनाग्रस्त और तस्करी के दौरान पकड़े गए गोवंश की देखभाल के लिए सभी 24 जिलों में 20-20 लाख रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया है। झारखंड गौ सेवा आयोग की इस पहल का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर चारा, पानी, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
प्रत्येक जिले में इस राशि की निगरानी संबंधित उपायुक्त करेंगे। आवश्यकता के अनुसार फंड से खर्च कर पशुओं के लिए जरूरी इंतजाम किए जा सकेंगे। नई व्यवस्था से प्रशासन को हर आपात स्थिति में अलग से राशि स्वीकृत होने की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।
धनबाद में इस फंड को विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है। जिले से गुजरने वाले जीटी रोड सहित विभिन्न मार्गों पर कथित अवैध परिवहन के मामलों में पकड़े गए पशुओं को गौशालाओं में रखना पड़ता है। बड़ी संख्या में पशु पहुंचने पर उनके भोजन, पानी और इलाज का खर्च बढ़ जाता है।
राज्य में कुल 23 निबंधित गौशालाएं बताई गई हैं। इनमें धनबाद जिले की श्री झरिया धनबाद गोशाला, बास्ताकोला और श्री गंगा गोशाला, कतरास शामिल हैं। पकड़े गए गोवंश को इन संस्थानों में लाए जाने के कारण उपलब्ध स्थान और संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
श्री गंगा गोशाला के अनुसार, बीते दो महीनों के दौरान वहां 150 से अधिक गोवंश लाए गए। उपलब्ध विवरण में अगस्त और अक्टूबर की कई कार्रवाइयों का उल्लेख है, जिनमें अलग-अलग स्थानों से पशुओं को पकड़कर सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी गौशालाओं को दी गई। कुछ मामलों में दर्जनों पशु एक साथ पहुंचे थे।
आयोग के पूर्व अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद के मुताबिक, पहले धन की कमी के कारण पकड़े गए गोवंश के लिए तत्काल चारा-पानी और दूसरी सुविधाएं जुटाने में प्रशासन को परेशानी होती थी। कॉर्पस फंड से जिलों को ऐसी परिस्थितियों में जल्द सहायता देने और पशुओं की देखभाल व्यवस्थित करने का स्थायी वित्तीय आधार मिलने की उम्मीद है।