रांची में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने सरकारी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों के विद्यार्थियों की शारीरिक तथा मानसिक सेहत के लिए नए परिनियम को स्वीकृति दी है। इसके तहत परिसरों में स्वास्थ्य केंद्र बनाना अनिवार्य होगा। प्रत्येक विद्यार्थी की डिजिटल हेल्थ आईडी भी तैयार की जाएगी, जिसे ई-समर्थ पोर्टल के हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम पर पंजीकृत किया जाएगा।
नई व्यवस्था में विद्यार्थियों के इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का प्रावधान है। परिसरों में प्राथमिक चिकित्सा, आपात सेवा, ऑनलाइन काउंसलिंग और वीडियो या ऑडियो परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। स्वास्थ्य और काउंसलिंग से संबंधित रिकॉर्ड की गोपनीयता सुनिश्चित करने का निर्देश भी परिनियम में शामिल है। आवश्यकता पड़ने पर विद्यार्थियों से न्यूनतम शुल्क लिया जा सकेगा।
विश्वविद्यालयों को अपने वार्षिक बजट का दो प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण संबंधी सुविधाओं पर खर्च करना होगा। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का कुल वार्षिक बजट 2,564.45 करोड़ रुपये है। इस आधार पर लगभग 51.29 करोड़ रुपये विद्यार्थियों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर व्यय किए जाने का अनुमान है। सीएसआर कोष और पूर्ववर्ती विद्यार्थियों से भी सहयोग लिया जा सकेगा।
प्रत्येक विश्वविद्यालय में कम से कम 1,500 वर्गफीट का स्वास्थ्य केंद्र प्रस्तावित है। इसमें ओपीडी, आपात कक्ष, काउंसलिंग रूम, प्रतीक्षालय और नर्स के लिए स्थान होगा। दो ऑब्जर्वेशन बेड के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर, ईसीजी मशीन, ग्लूकोमीटर, नेबुलाइजर तथा प्राथमिक उपचार किट रखने का प्रावधान है। यहां पूर्णकालिक डॉक्टर, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट और योग्य काउंसलर की नियुक्ति की जाएगी।
अंगीभूत कॉलेजों में कम से कम 300 वर्गफीट का हेल्थ सेंटर बनाया जाएगा। यहां एक ऑब्जर्वेशन बेड, आवश्यक जांच उपकरण और आपात दवाएं उपलब्ध रहेंगी। डॉक्टर और काउंसलर को प्रत्येक कॉलेज में सप्ताह में कम से कम दो दिन सेवा देनी होगी। छात्रावास वाले संस्थानों में दो बेड का अलग सिक रूम बनेगा, जबकि आवासीय संस्थानों में चौबीस घंटे एंबुलेंस सेवा रखने की व्यवस्था होगी।
मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर कुलपति और कॉलेज स्तर पर प्राचार्य की अध्यक्षता में समितियां गठित होंगी। प्रत्येक सेमेस्टर में योग, ध्यान, कला, संगीत या नृत्य से जुड़ी कम से कम दो कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य विषय पर हर वर्ष तीन कार्यशालाएं कराने का प्रावधान किया गया है।