रांची में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने डिप्लोमा-इन-फार्मेसी की परीक्षा और फार्मासिस्टों के निबंधन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। विभाग ने झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल को इन गतिविधियों को फिलहाल स्थगित रखने का निर्देश दिया है।
विभाग के संयुक्त सचिव अनुज कुमार प्रसाद की ओर से काउंसिल अध्यक्ष को भेजे गए पत्र के अनुसार, राज्य सरकार का अगला निर्णय आने अथवा झारखंड हाईकोर्ट से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने तक परीक्षा और निबंधन का कोई काम पूरा नहीं किया जाएगा। डिप्लोमा-इन-फार्मेसी परीक्षा समिति को भी सरकार की पूर्व अनुमति के बिना परीक्षा आयोजित नहीं करने को कहा गया है।
इस आदेश का असर राज्य में फार्मेसी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और निबंधन की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों पर पड़ेगा। हालांकि, उपलब्ध आदेश में स्थगन की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। दोनों प्रक्रियाओं को दोबारा शुरू करने का निर्णय सरकार या अदालत के अगले निर्देश पर निर्भर करेगा।
मामला झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल के तत्कालीन निबंधक-सह-सचिव प्रशांत कुमार पाण्डेय को पद से हटाए जाने के बाद उत्पन्न विवाद से जुड़ा है। शिकायतों की समीक्षा के बाद राज्य सरकार ने 17 अगस्त को उन्हें पदमुक्त करने का आदेश जारी किया था। पाण्डेय ने इस निर्णय को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है और उनकी याचिका अभी विचाराधीन है।
स्वास्थ्य विभाग के हालिया पत्र में हाईकोर्ट के 20 अगस्त के आदेश का भी उल्लेख किया गया है। विभाग ने काउंसिल अध्यक्ष और सभी सदस्यों से सरकारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इसके साथ ही काउंसिल प्रशासन से अब तक की गई कार्रवाई का विवरण भी शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
फिलहाल परीक्षा या निबंधन की अगली तारीख घोषित नहीं की गई है। विद्यार्थियों और निबंधन के आवेदकों के लिए स्थिति तभी स्पष्ट होगी, जब राज्य सरकार नया आदेश जारी करेगी या लंबित न्यायिक मामले में अदालत से आगे का निर्देश मिलेगा। तब तक संबंधित प्रक्रियाएं स्थगित रहेंगी।