रांची में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों से आगे सामान्य ज्ञान, विज्ञान, रचनात्मक लेखन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जोड़ने की पहल की है। इसके तहत स्कूलों में ‘पंख जूनियर’, ‘पंख सीनियर’, ‘विज्ञान ज्योति’ और ‘अबुआ लक्ष्य’ नाम की चार पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सामग्री विद्यार्थियों की कक्षा और उम्र को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के बच्चों के लिए ‘पंख जूनियर’ में सामान्य ज्ञान, रोचक तथ्य और जिज्ञासा बढ़ाने वाली सामग्री शामिल की गई है। बड़े विद्यार्थियों के लिए ‘पंख सीनियर’ में उनकी आयु और शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप विषय रखे गए हैं। विभाग का उद्देश्य बच्चों में नियमित पढ़ने की आदत विकसित करना और उन्हें अलग-अलग विषयों से परिचित कराना है।
कक्षा नौ से बारह तक के विद्यार्थियों के लिए ‘विज्ञान ज्योति’ को विज्ञान आधारित अध्ययन सामग्री के रूप में तैयार किया गया है। इसमें वैज्ञानिक तथ्यों और विज्ञान से जुड़े विषयों को सरल ढंग से समझाने पर जोर दिया गया है। इस सामग्री के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान को पाठ्यपुस्तक से अलग नजरिए से समझने और वैज्ञानिक सोच विकसित करने का अवसर मिलेगा।
सीनियर कक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार ‘अबुआ लक्ष्य’ में सामान्य अध्ययन, संभावित प्रश्न-उत्तर, करियर संबंधी जानकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री दी गई है। पत्रिका में झारखंड की संस्कृति, परंपरा और राज्य से संबंधित विषय भी शामिल हैं। इसे सिविल सेवा समेत दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की शुरुआती तैयारी में सहायक सामग्री के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है।
विभाग की व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक विद्यालय को ‘पंख जूनियर’ और ‘पंख सीनियर’ की दस-दस प्रतियां मिलेंगी। ‘विज्ञान ज्योति’ और ‘अबुआ लक्ष्य’ की बीस-बीस प्रतियां भेजी जा रही हैं। जुलाई से शुरू वितरण के तहत कई जिलों के विद्यालयों में पत्रिकाएं पहुंच चुकी हैं, जबकि शेष स्कूलों को चरणबद्ध ढंग से प्रतियां उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है।
इन पत्रिकाओं को केवल पठन सामग्री तक सीमित नहीं रखा जाएगा। ‘नो बैग डे’ की गतिविधियों में इनका उपयोग किया जा सकता है और शिक्षक विद्यार्थियों को निबंध, कविता तथा लघुकथा लिखने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी अभिनव कुमार के अनुसार, विद्यार्थियों की आयु और जरूरत के मुताबिक सामग्री देकर उन्हें रचनात्मक गतिविधियों, वैज्ञानिक सोच तथा भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं से जोड़ने पर जोर है।