झारखंड के सरकारी स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का नामांकन 0.67 प्रतिशत

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने झारखंड को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और नामांकन बढ़ाने के साथ शिक्षकों के प्रशिक्षण में सुधार के लिए कहा है।

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झारखंड के सरकारी स्कूल में समावेशी शिक्षा की सांकेतिक कक्षा

रांची में उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, झारखंड के सरकारी स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की हिस्सेदारी कुल नामांकन का केवल 0.67 प्रतिशत है। यह आंकड़ा यूडायस प्लस 2024-25 के आधार पर सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का ध्यान कम नामांकन की ओर दिलाया है।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ सरकारी स्कूलों में पढ़ने का अवसर देने के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत समावेशी शिक्षा कार्यक्रम चलाया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी सुलभ और समावेशी शिक्षा पर जोर दिया गया है। इसके बावजूद राज्य के स्कूलों में इन बच्चों की भागीदारी एक प्रतिशत से नीचे बनी हुई है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एक बैठक की कार्यवाही राज्य को भेजी है। इसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करने और सामान्य स्कूलों में उनका नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय ने कुल नामांकन में इन बच्चों की हिस्सेदारी कम होने का उल्लेख करते हुए कार्यक्रम के क्रियान्वयन में सुधार की आवश्यकता बताई है।

शिक्षकों के प्रशिक्षण की स्थिति भी सीमित बताई गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 6.19 प्रतिशत शिक्षक ही विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित हैं। समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत 536 विशेष शिक्षक बहाल हैं, लेकिन इनमें से कई प्रखंड संसाधन केंद्रों में कार्यरत हैं।

केंद्र ने राज्य सरकार से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और दिव्यांगजन अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। निर्देशों का केंद्र बच्चों की पहचान, स्कूलों तक उनकी पहुंच और उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की तैयारी बेहतर करने पर है।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान में सहायता के लिए केंद्र ने प्रशस्त-2.0 ऐप भी शुरू किया है। राज्य से इस ऐप का उपयोग करने का अनुरोध किया गया है। अब संबंधित विभाग के सामने पहचान और नामांकन बढ़ाने के साथ उपलब्ध शिक्षकों के प्रशिक्षण को व्यापक बनाने की जिम्मेदारी है।