हजारीबाग शहर के कालीबाड़ी में जय मां काली दुर्गा पूजा समिति ने इस वर्ष शिक्षा और शिक्षार्थी को अपने पूजा पंडाल की थीम बनाया है। यहां पुरानी शिक्षा पद्धति से लेकर आधुनिक व्यवस्था तक के बदलाव को कलात्मक रूप में दिखाया गया है। अजंता शैली में बनाई गई मां दुर्गा की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
पंडाल में मूर्तियों और अलग-अलग प्रॉप्स के माध्यम से स्कूल, शिक्षक और विद्यार्थी से जुड़े पहलुओं को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। आयोजन समिति ने पढ़ाई के बढ़ते दबाव के साथ विद्यार्थियों में होने वाली एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को भी थीम में जगह दी है। इसका उद्देश्य पूजा देखने आने वाले लोगों का ध्यान शिक्षार्थियों की मानसिक स्थिति और उनकी कठिनाइयों की ओर खींचना है।
प्रस्तुति में यह संदेश भी दिया गया है कि शिक्षा को केवल किताबों, परीक्षाओं और अच्छे अंकों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। समिति के अनुसार, पढ़ाई ऐसी होनी चाहिए जो व्यक्ति के समग्र विकास में सहायक बने और उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाए। पंडाल इसी विचार के जरिए शिक्षा के व्यापक उद्देश्य पर चर्चा की गुंजाइश पैदा करता है।
समिति के सदस्य इंद्रजीत अग्रवाल के मुताबिक, शिक्षा सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए समान रूप से आवश्यक है। पंडाल में इसी समानता को रेखांकित करते हुए हर व्यक्ति तक शिक्षा की पहुंच और पढ़ाई के लिए बराबर अवसर उपलब्ध कराने का संदेश रखा गया है। विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और पूरी शिक्षा व्यवस्था की भूमिका भी प्रस्तुति का हिस्सा है।
हजारीबाग की महारानी के नाम से जुड़ी यह पूजा समिति हर वर्ष अलग और संदेशपरक विषय पर पंडाल तैयार करती है। इस बार धार्मिक आस्था और कला के साथ सामाजिक सरोकार को जोड़ते हुए शिक्षा का विषय चुना गया। श्रद्धालु माता के दर्शन के साथ सजावट और उसके माध्यम से उठाए गए मुद्दों को भी देख रहे हैं।
आयोजन में पर्यावरण संरक्षण की पहल भी शामिल की गई है। भोग के लिए आने वाले सदस्यों को कपड़े की थैलियां दी जा रही हैं, ताकि प्लास्टिक का उपयोग कम किया जा सके। इस तरह कालीबाड़ी का पूजा पंडाल प्रतिमा और सजावट के साथ शिक्षा, विद्यार्थियों की मानसिक चुनौतियों, समान अवसर तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का साझा संदेश दे रहा है।