देवघर समेत झारखंड के सभी जिलों के सरकारी और निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की दिव्यांगता की प्रारंभिक जांच की जाएगी। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने प्रशस्त एप 2.0 के माध्यम से स्क्रीनिंग कराने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य विद्यालय स्तर पर ऐसे बच्चों की पहचान कर संबंधित शैक्षणिक रिकॉर्ड को अद्यतन करना है।
विभागीय सचिव उमा शंकर सिंह ने सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर अभियान को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने को कहा है। निर्देश के अनुसार प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों के लिए प्रारंभिक तैयारी तथा प्रशिक्षण की अवधि एक जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक निर्धारित की गई थी। इस दौरान उन्हें एप में लॉगिन कर उन्मुखीकरण से जुड़े वीडियो देखने और प्रशिक्षण लेने को कहा गया था।
अभियान का पहला स्क्रीनिंग चरण एक सितंबर से शुरू हो चुका है और इसे 30 सितंबर तक पूरा किया जाना है। प्रधानाध्यापक अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की जांच की जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंपेंगे। शिक्षक प्रशस्त एप में स्क्रीनिंग के पार्ट-1 से संबंधित प्रक्रिया पूरी करेंगे।
इसके बाद एक से 30 अक्टूबर तक दूसरे चरण की स्क्रीनिंग कराई जाएगी। पार्ट-2 का कार्य रिसोर्स शिक्षक अथवा थेरैपिस्ट करेंगे। इस तरह विद्यालय में हुई प्रारंभिक पहचान के बाद संबंधित विशेषज्ञों को अगले स्तर की जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
दोनों चरण पूरे होने पर दिव्यांग बच्चों की सूची तैयार की जाएगी। विभाग के निर्देश के मुताबिक इस सूची को यू-डायस प्लस 2026-27 में अपडेट किया जाना है। शिक्षकों को समावेशी शिक्षा से संबंधित ऑनलाइन मॉड्यूल का प्रशिक्षण लेने के लिए भी कहा गया है।
संबंधित अधिकारियों और विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को अभियान की नियमित निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्क्रीनिंग से लेकर सूची अद्यतन करने तक की पूरी प्रक्रिया तय अवधि में सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी विद्यालय या कक्षा का काम लंबित न रहे।