झारखंड डीजीपी नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 29 सितंबर को

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े मामले को 29 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। सुनवाई के दौरान तदाशा मिश्रा की नियुक्ति और राज्य की नियमावली पर सवाल उठे।

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झारखंड डीजीपी नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का प्रतीकात्मक दृश्य

रांची। झारखंड में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति से जुड़े मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 29 सितंबर को होगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान झारखंड के मामले को भी उसी तारीख पर लेने का आग्रह किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

सुनवाई मूल रूप से ओडिशा के डीजीपी की नियुक्ति से संबंधित मामले में हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र का पक्ष रखने की बात कही। इसके बाद अगली तारीख 29 सितंबर निर्धारित की गई और झारखंड के डीजीपी नियुक्ति विवाद को भी उसी दिन सुनने का अनुरोध रखा गया।

याचिकाकर्ता बाबूलाल मरांडी की ओर से पेश अधिवक्ता अभिषेक राय के अनुसार, अदालत ने मामले में एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट से सहमति जताई। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान तदाशा मिश्रा को सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले डीजीपी बनाए जाने पर आपत्ति भी सामने आई।

अदालत के समक्ष झारखंड सरकार की डीजीपी नियुक्ति नियमावली का विषय भी रखा गया। सुनवाई में यह दलील दी गई कि नियमावली किसी अलग अधिनियम के तहत नहीं बनाई गई है। राज्य की ओर से इसे पुलिस अधिनियम, 1861 के अंतर्गत तैयार किए जाने की बात कही गई थी।

इसके जवाब में अदालत को बताया गया कि पुलिस अधिनियम, 1861 के तहत डीएसपी अथवा उससे नीचे के पदों के लिए नियुक्ति नियम बनाए जा सकते हैं, जबकि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए ऐसी नियमावली बनाने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है। इस कानूनी प्रश्न पर अब आगे की सुनवाई में पक्ष रखे जाने की संभावना है।

एमिकस क्यूरी ने भी अपनी रिपोर्ट में सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में दिए गए फैसले के अनुरूप नहीं माना है। मामले में नियुक्ति प्रक्रिया और राज्य की नियमावली से जुड़े प्रश्नों पर अब 29 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी।