रांची में पुलिस मुख्यालय की समीक्षा बैठक में झारखंड पुलिस के लंबित सेवा और प्रशासनिक मामलों को समयबद्ध ढंग से निपटाने का निर्देश दिया गया। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने एसीपी-एमएसीपी, पदोन्नति, मालखाना प्रबंधन और लंबित कांडों के प्रभार से जुड़े मामलों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पुलिसकर्मियों के मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
बैठक में अगले एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले पुलिसकर्मियों के एसीपी-एमएसीपी मामलों को प्राथमिकता देने पर जोर रहा। सेवानिवृत्त हो चुके कर्मियों के लंबित मामलों को भी जल्द पूरा करने को कहा गया। पुलिसकर्मी, ट्रेड चालक, आर्मोरर और हवलदार संवर्ग से संबंधित प्रकरणों पर जिला स्तर पर कार्रवाई कर उसकी जानकारी पुलिस मुख्यालय को भेजने का निर्देश दिया गया।
पदोन्नति के लंबित मामलों की भी अलग से समीक्षा की गई। आरक्षी से हवलदार, हवलदार से सहायक अवर निरीक्षक और सहायक अवर निरीक्षक से पुलिस अवर निरीक्षक पद तक की प्रोन्नति प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया। निर्देश का उद्देश्य पात्र कर्मियों को समय पर पदोन्नति का लाभ दिलाना और प्रक्रियागत देरी कम करना है।
थानों के मालखानों तथा कांडों के प्रभार हस्तांतरण पर भी चर्चा हुई। जिलों को ऐसे थानों और पदाधिकारियों की पहचान करने का निर्देश मिला, जहां स्थानांतरण के बाद भी मालखाने या मामलों का प्रभार लंबित है। वर्तमान थाना प्रभारियों के साथ समन्वय बनाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रभार सौंपने को कहा गया।
रिक्त पदों को भरने की तैयारी के तहत जिलों को उपलब्ध रिक्तियों में से 50 प्रतिशत पदों का रोस्टर क्लियरेंस कराने का निर्देश दिया गया। विभिन्न संवर्गों में खाली पदों की स्थिति वाली सूची 15 दिनों के भीतर पुलिस मुख्यालय को देनी होगी। पुलिस अधीक्षकों से पुलिस सभा आयोजित कर कर्मियों की समस्याएं सुनने और समाधान की दिशा में कदम उठाने को भी कहा गया।
बैठक में पुलिस प्रशासन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मुख्यालय में उपस्थित रहे, जबकि क्षेत्रीय पुलिस उप-महानिरीक्षक, वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित समीक्षा और तय समय में कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई।