झारखंड में अक्टूबर का चना दाल वितरण एक प्रतिशत से नीचे, देवघर में सबसे धीमी रफ्तार

पीडीएस के 22 अक्टूबर तक के उपलब्ध आंकड़ों में एनएफएसए लाभार्थियों को 0.36 प्रतिशत और ग्रीन कार्डधारकों को 0.59 प्रतिशत चना दाल ही वितरित होने की जानकारी सामने आई है।

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झारखंड में पीडीएस के माध्यम से चना दाल वितरण की सांकेतिक तस्वीर

झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से अक्टूबर महीने की चना दाल लाभार्थियों तक पहुंचाने की रफ्तार बेहद धीमी है। 22 अक्टूबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और झारखंड स्टेट फूड सिक्योरिटी स्कीम के ग्रीन कार्डधारकों—दोनों श्रेणियों में वितरण आवंटन के एक प्रतिशत तक भी नहीं पहुंचा।

राज्य के 24 जिलों में 24,967 जन वितरण प्रणाली दुकानें संचालित हैं, जिनसे करीब 59.83 लाख राशन कार्डधारक जुड़े हैं। इसके बावजूद एनएफएसए के तहत आवंटित मात्रा में से केवल 21,811 किलोग्राम चना दाल बांटी गई। यह कुल आवंटन का 0.36 प्रतिशत है।

ग्रीन कार्डधारकों के लिए 8.06 लाख किलोग्राम दाल आवंटित होने की जानकारी दी गई है। इसमें से 4,754 किलोग्राम, यानी 0.59 प्रतिशत दाल का ही वितरण हो सका। योजना के तहत गरीब परिवारों को हर महीने एक किलोग्राम चना दाल का पैकेट मुफ्त देने का प्रावधान है और राज्य में 68 लाख परिवारों को इसका लाभ देने की व्यवस्था बताई गई है।

जिलावार स्थिति में चतरा 1,841 किलोग्राम और 0.98 प्रतिशत वितरण के साथ उपलब्ध आंकड़ों में सबसे आगे रहा। राजधानी रांची में 1,371 किलोग्राम दाल बांटी गई और वितरण दर 0.27 प्रतिशत रही। धनबाद में यह दर 0.08 प्रतिशत तथा साहिबगंज में 0.10 प्रतिशत दर्ज की गई।

देवघर में वितरण की रफ्तार सबसे कम बताई गई है। जिले में आवंटन के मुकाबले केवल 92 किलोग्राम दाल लाभार्थियों तक पहुंची, जो 0.04 प्रतिशत है। जिलों के आंकड़ों में दिख रहा अंतर राज्य स्तर पर आपूर्ति और वितरण की गति की निगरानी की जरूरत को रेखांकित करता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खरीद और आपूर्ति में देरी के कारण चना दाल वितरण का लंबित बोझ करीब एक वर्ष तक पहुंच गया है और अभी पहले से बची दाल बांटी जा रही है। एक वर्ष के लिए एकमुश्त खरीद के पूर्व निर्णय के बाद अब तीन-तीन महीने के अंतराल पर खरीद की पुरानी व्यवस्था पर फिर विचार होने की बात कही गई है। खरीद प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय और जिलों में वितरण की रफ्तार बढ़ने तक नियमित मासिक आपूर्ति की स्थिति स्पष्ट नहीं है।