झारखंड में मरीजों और घायलों को जरूरत के समय रक्त उपलब्ध कराने के लिए नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग और एमएस साइंस कंपनी के बीच बुधवार को हुए समझौते के अनुसार, फोन पर मांग मिलने के चार घंटे के भीतर संबंधित अस्पताल तक रक्त पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस सेवा को अगले तीन महीने में शुरू करने की बात कही गई है।
रांची में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की मौजूदगी में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। प्रस्तावित व्यवस्था के लिए एक टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा। संचालन और मांग की निगरानी के लिए रांची में कमांड सेंटर स्थापित करने की योजना भी है। अभी टोल-फ्री नंबर की घोषणा नहीं की गई है।
समझौते के तहत कंपनी को रक्त के संग्रह से लेकर उसकी जांच, भंडारण, रखरखाव और अस्पताल तक सुरक्षित आपूर्ति की जिम्मेदारी दी गई है। एजेंसी स्वयं रक्तदान शिविर आयोजित करेगी, जबकि स्वास्थ्य विभाग तकनीकी सहयोग देगा। आवश्यक मानव संसाधन और दूसरी व्यवस्थाएं जुटाने का दायित्व भी कंपनी का होगा। भुगतान प्रति यूनिट रक्त के आधार पर किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने रक्त की जांच निर्धारित मानकों के अनुरूप करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में बिना जांच का रक्त मरीज को नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी और निजी अस्पतालों में रक्त की उपलब्धता बेहतर करना तथा जरूरतमंद परिवारों को अलग-अलग ब्लड बैंकों के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत देना है।
विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के साथ एनसीसी, एनएसएस, पुलिस बल और निजी शिविरों के माध्यम से भी रक्त एकत्र करने की योजना है। रक्तदान शिविरों में आने वाले दाताओं के लिए रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था एजेंसी करेगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि अगले 90 दिनों में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। सेवा की वास्तविक शुरुआत, टोल-फ्री नंबर और संचालन संबंधी विस्तृत प्रक्रिया अगले चरण में सामने आने की अपेक्षा है।