रांची में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने दामोदर घाटी निगम के राज्य स्थित वितरण नेटवर्क की परिसंपत्तियों का अलग हिसाब तैयार करने की दिशा में प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए ऐसी कंसल्टेंट फर्म नियुक्त की जाएगी, जो परिसंपत्तियों की भौतिक पहचान और सत्यापन के साथ उनकी लागत का आकलन करेगी। यह कवायद झारखंड में डीवीसी के वितरण कारोबार के लिए टैरिफ निर्धारण से जुड़ी है।
आयोग फिलहाल कंसल्टेंट के चयन में जुटा है। चयनित फर्म को 90 दिनों के भीतर डीवीसी के एकीकृत ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क में से झारखंड के वितरण कारोबार से संबंधित परिसंपत्तियों की पहचान करनी होगी। इसके बाद चिह्नित संपत्तियों का वित्तीय मूल्यांकन किया जाएगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि डीवीसी की कौन-कौन सी परिसंपत्तियां झारखंड के वितरण क्षेत्र में आती हैं और उनकी वास्तविक लागत कितनी है। भौतिक सत्यापन और वित्तीय मूल्यांकन पूरा होने पर राज्य में बिजली वितरण से जुड़ी संपत्तियों का पृथक विवरण उपलब्ध हो सकेगा।
आयोग के सचिव राजेंद्र प्रसाद के अनुसार, अब तक डीवीसी उत्पादन लागत को भी वितरण टैरिफ में शामिल कर नए टैरिफ का निर्धारण कराता रहा है। दूसरी ओर, उत्पादन और ट्रांसमिशन के लिए अलग-अलग शुल्क भी लिए जाते हैं। इस व्यवस्था में वितरण टैरिफ के भीतर इन मदों की स्थिति अलग से स्पष्ट नहीं हो पाती थी।
डीवीसी की सकल स्थायी परिसंपत्तियों यानी ग्रोस फिक्स्ड एसेट की जानकारी मिलने के बाद उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण के लिए अलग-अलग टैरिफ निर्धारित किए जा सकेंगे। इससे झारखंड में वितरण कारोबार के लिए उपयोग की जा रही परिसंपत्तियों और उनकी लागत को पृथक रूप से समझने का आधार तैयार होगा।
सलाहकार की रिपोर्ट के आधार पर टैरिफ से संबंधित आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी। आयोग की पहल पूरी होने पर परिसंपत्ति मूल्य और अलग-अलग बिजली सेवाओं से जुड़ी लागत का स्पष्ट आकलन उपलब्ध होने की उम्मीद है। फिलहाल कंसल्टेंट का चयन होना बाकी है और उसके बाद निर्धारित 90 दिनों में पहचान, सत्यापन तथा मूल्यांकन का काम पूरा किया जाना है।