रांची। झारखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी कई ग्रामीण सड़कों की मरम्मत का इंतजार और लंबा हो सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में रखरखाव की एक भी योजना स्वीकृत नहीं हुई थी। चालू वित्त वर्ष में भी मरम्मत की योजनाएं लेने पर अब तक स्पष्ट निर्णय नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में कुछ सड़कों का काम अगले वित्त वर्ष तक टलने की आशंका है।
करीब एक सप्ताह पहले दिल्ली से आई नेशनल क्वालिटी मॉनिटरिंग एवं जांच टीम ने पीएमजीएसवाई की सड़कों का निरीक्षण किया था। विवरण के अनुसार, टीम को कई सड़कों की हालत रखरखाव के अभाव में खराब मिली। टीम ने राज्य के अधिकारियों को इनकी तत्काल मरम्मत कराने का निर्देश दिया, जिसके बाद ग्रामीण कार्य विभाग ने मामले पर ध्यान दिया है।
पीएमजीएसवाई के तहत बनी सड़क के निर्माण के बाद पांच वर्षों तक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होती है। यह अवधि पूरी होने पर मरम्मत का खर्च राज्य सरकार को अपने मद से उठाना पड़ता है। राज्य सरकार ने दो वर्ष पहले कुछ मरम्मत योजनाएं स्वीकृत की थीं, लेकिन उनका क्रियान्वयन नहीं हो पाया।
राज्य के लगभग सभी जिलों में ऐसी सड़कों की स्थिति खराब बताई गई है। इनमें कई सड़कें 10 से 20 वर्ष पहले बनी थीं। कुछ मार्गों की मरम्मत हुई है, लेकिन बड़ी संख्या में सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हैं। इससे गांवों के बीच आवागमन प्रभावित हो रहा है। बरसात में पानी और कीचड़ के कारण इन मार्गों पर परेशानी तथा जोखिम और बढ़ जाता है।
पिछले वित्त वर्ष में योजनाएं लेने की नीति तय नहीं होने के कारण मरम्मत का काम आगे नहीं बढ़ सका। चालू वित्त वर्ष के बजट में सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 1,600 करोड़ रुपये रखे गए हैं, पर पीएमजीएसवाई सड़कों के रखरखाव के संबंध में निर्णय अभी लंबित है। इसी वजह से बड़ी संख्या में सड़कों का मेंटेनेंस शुरू नहीं हो पाया है।
विभागीय इंजीनियरों के मुताबिक वित्त वर्ष समाप्त होने में करीब छह महीने शेष हैं। इस अवधि में मरम्मत योजनाएं लेने पर सहमति बनती है तो कुछ जर्जर सड़कों की स्थिति सुधारी जा सकती है। यदि चालू वित्त वर्ष में स्वीकृति नहीं मिली, तो संबंधित ग्रामीण इलाकों को अगले वित्त वर्ष तक इंतजार करना पड़ सकता है।