झारखंड में पीएम मातृ वंदना योजना से 1.94 लाख लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य

वित्तीय वर्ष 2026-27 में पीएम मातृ वंदना योजना के तहत 1,94,628 लाभार्थियों को जोड़ने की तैयारी है। शक्ति सदन योजना का विस्तार भी दूसरे जिलों तक करने की प्रक्रिया चल रही है।

2 मिनट पढ़ें 4 बार पढ़ी गई
झारखंड में मातृ वंदना और महिला पुनर्वास योजनाओं के विस्तार की तैयारी

झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 1,94,628 लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। गर्भवती और धात्री महिलाओं तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर सभी सेविकाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र महिला को पहले जीवित बच्चे के जन्म पर दो निर्धारित किस्तों में कुल 5,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यदि दूसरी संतान बेटी है तो पात्र लाभार्थी को एकमुश्त 6,000 रुपये देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण संबंधी जरूरतों में सहायता देना है।

महिलाओं की सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़ी शक्ति सदन योजना के क्रियान्वयन पर भी सरकार का जोर है। मिशन शक्ति के तहत संचालित इस व्यवस्था में तस्करी, शोषण या दूसरी विषम परिस्थितियों का सामना कर रही महिलाओं को सुरक्षित आश्रय, चिकित्सा सहायता, कानूनी परामर्श और पुनर्वास की सुविधा देने का प्रावधान है।

राज्य के 12 जिलों में शक्ति सदन स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल इसका संचालन केवल रांची में हो रहा है। अन्य जिलों में केंद्रों को शुरू करने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है। रांची, हजारीबाग, पलामू, साहिबगंज, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम और गुमला में गैर-सरकारी संगठनों के चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा स्वीकृति के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं।

देवघर में गैर-सरकारी संगठन का चयन होने के बाद प्रस्ताव प्राप्त हो गया है। रामगढ़, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो में संगठन चयन की प्रक्रिया अभी जारी है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद स्वीकृत जिलों में शक्ति सदन का संचालन आगे बढ़ सकेगा।

सरकार पालना योजना के माध्यम से बच्चों से जुड़ी देखभाल और कुपोषण की समस्या पर भी काम कर रही है। पीएम मातृ वंदना योजना के लिए तय लाभार्थी लक्ष्य और शक्ति सदन के प्रस्तावित विस्तार को महिलाओं तथा बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं के व्यापक क्रियान्वयन का हिस्सा बताया गया है।