देवघर जिले के देवीपुर में कुष्ठ रोग की समय पर पहचान और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चार दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। एम्स देवघर की ओर से राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के समन्वय से हुए इस आयोजन में झारखंड के विभिन्न जिलों के करीब 100 लैब तकनीशियनों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण दो चरणों में 18-19 सितंबर और 25-26 सितंबर 2026 को हुआ। इसके लिए राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, झारखंड ने वित्तीय सहयोग दिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला तकनीशियनों की जांच संबंधी दक्षता बढ़ाना और रोग की प्रभावी निगरानी में उनकी भूमिका को मजबूत करना था।
प्रतिभागियों को स्लिट स्किन स्मियर यानी एसएसएस और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस सर्विलांस से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी गई। इसके साथ ही व्यावहारिक प्रशिक्षण भी कराया गया, ताकि जांच प्रक्रिया, रोग की शीघ्र पहचान और निगरानी से जुड़े कार्यों को बेहतर तरीके से किया जा सके।
प्रशिक्षण में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, रांची, खूंटी, लोहरदगा, सिमडेगा और गुमला सहित कई जिलों के तकनीशियन शामिल हुए। पलामू, लातेहार, गढ़वा, चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, कोडरमा और धनबाद से भी प्रतिभागी पहुंचे।
एम्स देवघर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. रत्नेश कुमार, डॉ. श्याम किशोर कुमार, डॉ. सुमन कुमार, डॉ. विमल सिंह मुंडा, डॉ. नेहा शरद और डॉ. मिथिलेश कुमार झा ने प्रशिक्षण दिया। त्वचा रोग विभाग की डॉ. गजल अहमद और डॉ. शिवानी ने भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभागीय रेजिडेंट्स, लैब स्टाफ और तकनीकी टीम ने आयोजन में सहयोग किया।
कार्यक्रम को सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद, डीएलओ डॉ. मनोज कुमार गुप्ता, डीएलसी डॉ. राजेश वर्मा और एनएलईपी झारखंड के वित्त-सह-प्रशासनिक पदाधिकारी रंजीत रंजन पाठक का सहयोग मिला। राज्य के कई जिलों में कुष्ठ के मामले सामने आने के बीच यह प्रशिक्षण जांच, समय पर पहचान और निगरानी क्षमता बेहतर करने की दिशा में केंद्रित रहा।