झारखंड में मतदाता सूची के दावों पर दस्तावेज सत्यापन तेज, दूसरे राज्यों को भेजे गए करीब 20 हजार कागजात

विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जा रही हैं। दूसरे राज्यों से जारी प्रमाणपत्र संबंधित राज्य के निर्वाचन तंत्र से सत्यापित कराए जा रहे हैं।

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रांची में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया

रांची में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की निगरानी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जमा दस्तावेजों की जांच तेज कर दी गई है। राज्य में मतदाता के रूप में नाम जोड़ने के लिए आए दावों और आपत्तियों का समय 30 सितंबर तक है। आवेदकों की ओर से झारखंड के साथ दूसरे राज्यों के संस्थानों द्वारा जारी प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किए गए हैं।

जिन मामलों में निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी ने नोटिस दिया है, उनमें पात्रता के समर्थन में अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। ऐसे कागजात बीएलओ ऐप के माध्यम से जांच के लिए अपलोड किए जाएंगे। जिन लोगों का नाम पिछले पुनरीक्षण में नहीं था, उनका सत्यापन और सुनवाई दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है।

पता बदलने, मतदाता सूची में एक से अधिक बार नाम दर्ज होने या आवेदन में अधूरी जानकारी मिलने के मामलों में भी पहचान और नागरिकता से जुड़े कागजात प्रस्तुत करने को कहा जा रहा है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी को ईसीआईनेट पर दस्तावेज प्राप्त होने के पांच दिनों के भीतर उनका सत्यापन करना है।

यदि दस्तावेज झारखंड के किसी दूसरे जिले के विभाग से जारी हुआ है, तो उसे ईसीआईनेट के जरिए संबंधित जिला निर्वाचन पदाधिकारी को भेजा जाएगा। दूसरे राज्य से जारी दस्तावेज उस राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के माध्यम से संबंधित विभाग या संस्था तक सत्यापन के लिए पहुंचाए जा रहे हैं। सीबीएसई और आईसीएसई के प्रमाणपत्रों की जांच भी संबंधित बोर्ड से कराई जा रही है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रवि कुमार के अनुसार, प्रयाग महिला विद्यापीठ से जारी प्रमाणपत्र मान्य नहीं पाए गए हैं। उन्होंने कहा है कि किसी दस्तावेज के अवैध या फर्जी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। जिला और राज्य के भीतर जारी कागजात की जांच जिला निर्वाचन पदाधिकारी के स्तर पर की जा रही है।

कार्यालय के अनुसार, दूसरे राज्यों को सत्यापन के लिए भेजे गए दस्तावेजों की संख्या करीब 20 हजार है। इनमें सबसे अधिक कागजात बिहार और उसके बाद उत्तर प्रदेश भेजे गए हैं। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, गुजरात और असम को भी दस्तावेज भेजे गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 24 सितंबर तक बिहार में 1,340 दस्तावेजों का सत्यापन लंबित था।