झारखंड में मध्याह्न भोजन योजना के लिए जिलों को 302 करोड़ रुपये आवंटित

सात महीने के इंतजार के बाद जारी संशोधित आवंटन से कुकिंग कॉस्ट, रसोइया-सहायिकाओं के मानदेय, रागी हलवा और किचेन गार्डन जैसे मदों में खर्च का रास्ता साफ हुआ।

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झारखंड में मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को भोजन परोसते विद्यालयकर्मी

झारखंड मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने पीएम पोषण शक्ति योजना के तहत जिलों के लिए 302 करोड़ रुपये का संशोधित आवंटन जारी किया है। चालू वित्तीय वर्ष शुरू होने के करीब सात महीने बाद मिली इस राशि से विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के संचालन और उससे जुड़े भुगतान में राहत मिलने की उम्मीद है।

कुल आवंटन में 181 करोड़ 27 लाख 88 हजार रुपये केंद्र सरकार का हिस्सा है, जबकि शेष राशि राज्यांश के रूप में दी गई है। यह रकम भोजन तैयार करने की लागत, रसोइया-सहायिकाओं के मानदेय, रागी हलवा, किचेन गार्डन तथा योजना से संबंधित अन्य स्वीकृत मदों पर खर्च की जा सकेगी।

प्राधिकरण ने इससे पहले 19 सितंबर को भी राशि आवंटित की थी, लेकिन राज्यांश से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण निकासी नहीं हो पा रही थी। वित्त विभाग ने 12 अक्टूबर को समस्या का समाधान किया। इसके बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने 29 अक्टूबर को आवश्यक सुधार किया और संशोधित आवंटन जारी किया गया।

आदेश के अनुसार, कुकिंग कॉस्ट की राशि बालवाटिका कक्षाओं के लिए लगभग 112 दिनों की है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए करीब 107 दिनों का प्रावधान किया गया है। विद्यालयों को उपलब्ध पुरानी शेष राशि का समायोजन करने के बाद ही बिल का भुगतान किया जाएगा।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि आवंटित धन का इस्तेमाल किसी दूसरी योजना या मद में नहीं किया जा सकता। राशि के उपयोग में निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया और योजना के उद्देश्यों का पालन करना होगा। इससे जिलों और विद्यालयों को भुगतान तथा खर्च का हिसाब तय नियमों के अनुसार रखने की जिम्मेदारी भी होगी।

अब तक नियमित राशि नहीं मिलने के कारण कई विद्यालय अन्य मदों में उपलब्ध धन से मध्याह्न भोजन चला रहे थे। कुछ प्रधानाध्यापक अपने खर्च से भी व्यवस्था संभाल रहे थे। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने आठ नवंबर तक बकाया राशि नहीं मिलने पर नौ नवंबर से योजना बंद करने की चेतावनी दी थी। संशोधित आवंटन के बाद इस तात्कालिक संकट के दूर होने की संभावना बनी है।