झारखंड में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के चार महीनों के दौरान 1005.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। एक जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य वर्षापात 1022.9 मिलीमीटर माना गया है। इस आधार पर पूरे राज्य की बारिश सामान्य से करीब दो प्रतिशत कम रही। अब पांच अक्टूबर के आसपास मानसून की वापसी की संभावना जताई गई है।
राज्य के अलग-अलग जिलों में वर्षा का वितरण एक समान नहीं रहा। पश्चिमी सिंहभूम में 1476 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 47 प्रतिशत अधिक है। सरायकेला-खरसावां में 1220.3 मिलीमीटर वर्षापात के साथ 21 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। लातेहार में सामान्य से 13 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में 12 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।
इसके विपरीत पाकुड़ में सबसे बड़ा अंतर सामने आया। जिले में 584.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 52 प्रतिशत कम है। चतरा में 36 प्रतिशत, देवघर में 29 प्रतिशत, गुमला में 26 प्रतिशत और गढ़वा में 24 प्रतिशत कम वर्षापात दर्ज किया गया। कोडरमा में यह कमी 22 प्रतिशत रही, जबकि हजारीबाग और पलामू में सामान्य से 20-20 प्रतिशत कम बारिश हुई।
राजधानी रांची में मानसून की स्थिति राज्य के औसत से बेहतर रही। यहां 1215.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षापात 1027.7 मिलीमीटर है। इस तरह रांची में सामान्य से 18 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। धनबाद, जामताड़ा, खूंटी, रामगढ़ और लोहरदगा में भी वर्षापात सामान्य से थोड़ा अधिक रहा।
मौसम संबंधी आकलन के मुताबिक एक से पांच अक्टूबर तक झारखंड में बारिश, आंधी या वज्रपात को लेकर कोई विशेष चेतावनी नहीं है। इस अवधि में मौसम मुख्य रूप से साफ रहने की उम्मीद है। रांची का अधिकतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।
झारखंड में मुख्य मानसूनी वर्षा जून से सितंबर के बीच होती है। पांच अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी संभावित है, हालांकि इसके बाद भी अक्टूबर से फरवरी के बीच राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। जिलावार आंकड़े बताते हैं कि राज्य का कुल औसत सामान्य के करीब रहा, लेकिन स्थानीय स्तर पर वर्षा में बड़ा अंतर दर्ज किया गया।