झारखंड में रबी खेती बढ़ाने पर जोर, किसानों को बहुफसली खेती अपनाने की सलाह

कृषि निदेशालय ने 2026-27 के रबी मौसम में 15.5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खेती का लक्ष्य रखा है। विभाग ने बीज और उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही है।

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रांची में रबी खेती और बहुफसली कृषि को लेकर जानकारी देता कृषि विभाग

रांची में झारखंड कृषि निदेशालय ने किसानों को एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय बहुफसली खेती अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने खरीफ के बाद रबी फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। चालू रबी मौसम में 15.5 लाख हेक्टेयर से अधिक खेत में फसल आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कृषि निदेशक बिद्यानंद शर्मा पंकज के अनुसार, राज्य में लगभग 38 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। इसमें करीब 28 लाख हेक्टेयर में खरीफ और 10 लाख हेक्टेयर में रबी फसलें उगाई जाती हैं। इस अंतर को कम करने के लिए विभाग गेहूं, दलहन, तिलहन और मक्का जैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित कर रहा है।

निदेशालय के मुताबिक, खरीफ मौसम में फसल आच्छादन निर्धारित लक्ष्य के 90 प्रतिशत से ऊपर रहा है। सामान्य मानसूनी बारिश के बाद विभाग ने अब रबी की तैयारियों पर ध्यान बढ़ाया है। किसानों तक बीज पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और राज्य में उर्वरक का पर्याप्त भंडार उपलब्ध होने का दावा किया गया है।

विभाग का विशेष ध्यान पलामू, गढ़वा और दक्षिणी छोटानागपुर के जिलों में रबी खेती का क्षेत्र बढ़ाने पर है। हालांकि, कृषि निदेशक ने यह भी कहा कि सामान्य मानसून के बावजूद कुछ जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई। ऐसे क्षेत्रों में रबी उत्पादन के लिए खेतों में उपलब्ध नमी और सिंचाई के साधन महत्वपूर्ण होंगे।

कृषि निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में गेहूं, चना, राई और सरसों प्रमुख रबी फसलें हैं। आलू, मक्का, मटर और मसूर की खेती भी की जाती है। सीमित सिंचाई सुविधाएं, मानसूनी वर्षा पर निर्भरता, पठारी भूभाग और अम्लीय मिट्टी रबी खेती के विस्तार की प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।

धान की कटाई के बाद राज्य में लगभग 14.8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र खाली रह जाने का अनुमान है। सरकार की डबल क्रॉपिंग योजना के तहत ऐसे खेतों में चना और सरसों को बढ़ावा देने की तैयारी है। विभाग का मानना है कि खरीफ के साथ रबी फसल लेने से किसानों की आमदनी बढ़ाने और राज्य का अनाज उत्पादन मजबूत करने में मदद मिल सकती है।