झारखंड में जनवितरण प्रणाली के जरिए मिलने वाले किरासन तेल की दर्ज आवश्यकता और वास्तविक उठाव के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। आपूर्ति विभाग के आंकड़ों में सितंबर के लिए राज्य को कुल 71,32,734 लीटर किरासन तेल की जरूरत बताई गई, लेकिन अगस्त और सितंबर में किसी पीडीएस डीलर ने तेल नहीं उठाया।
राज्य के सभी जिलों के लिए अलग-अलग आवश्यकता दर्ज की गई थी। इनमें रांची के लिए 6,12,975 लीटर, धनबाद के लिए 5,19,163 लीटर, पूर्वी सिंहभूम के लिए 4,96,685 लीटर, गिरिडीह के लिए 4,82,721 लीटर और पलामू के लिए 4,62,094 लीटर किरासन की जरूरत बताई गई। बोकारो की आवश्यकता 4,24,518 लीटर दर्ज थी।
वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में कुछ जिलों में सीमित खरीद और वितरण हुआ था। लातेहार के थोक विक्रेता ने अप्रैल में 12 हजार और मई में 23 हजार लीटर तेल खरीदा। इनमें क्रमशः केवल 30 लीटर और 83 लीटर ही डीलरों तक पहुंचा।
जुलाई में खूंटी में 12 हजार लीटर किरासन खरीदा गया और डीलर ने पूरी मात्रा ली। इसी महीने कुछ अन्य जिलों को भी तेल आवंटित किया गया था। अगस्त में सभी जिलों के लिए 8.36 लाख लीटर का आवंटन हुआ, लेकिन इसके बाद डीलरों की ओर से उठाव दर्ज नहीं किया गया।
धनबाद में पीडीएस दुकानों पर किरासन तेल के भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं होना भी उठाव में बाधा बताया गया है। विभाग के मुताबिक कुछ दुकानदारों के पास टैंक उपलब्ध हैं, लेकिन वे उपयोग में नहीं हैं। ऐसी स्थिति में आवंटन होने के बावजूद तेल वितरण की व्यवस्था आगे नहीं बढ़ पा रही है।
आंकड़े बताते हैं कि राज्य स्तर पर किरासन तेल की आवश्यकता अभी भी दर्ज की जा रही है, जबकि वितरण तंत्र में वास्तविक मांग और भंडारण सुविधा स्पष्ट नहीं है। आवंटन, डीलरों के उठाव और उपभोक्ताओं तक आपूर्ति के बीच यह अंतर पीडीएस व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को रेखांकित करता है।