झारखंड में 107 माध्यमिक विद्यालयों की अनुदान अपील खारिज, स्थापना अनुमति पर जैक से मांगा जाएगा स्पष्टीकरण

विभागीय अनुदान समिति की समीक्षा में कई वित्त रहित माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना अनुमति और जरूरी मानकों को लेकर कमियां सामने आईं। समिति ने 107 विद्यालयों की अपील अस्वीकार कर दी।

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रांची में विद्यालयों के अनुदान आवेदनों की समीक्षा करती विभागीय समिति का सांकेतिक दृश्य

रांची में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अनुदान समिति ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुदान से वंचित 107 वित्त रहित माध्यमिक विद्यालयों की अपील खारिज कर दी है। विभागीय समीक्षा में कई विद्यालयों को झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से स्थापना अनुमति दिए जाने की प्रक्रिया और निर्धारित मानकों के पालन पर सवाल उठे हैं।

विभागीय सचिव उमाशंकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में विद्यालयों से मिले अपील आवेदनों की जांच की गई। समिति के अनुसार, कुछ मामलों में आवश्यक दस्तावेजों और उपलब्ध सुविधाओं की समुचित समीक्षा किए बिना स्थापना अनुमति देने की बात सामने आई। समिति ने जैक से स्पष्टीकरण लेने और गड़बड़ी प्रमाणित होने पर जिम्मेदार पदाधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई की अनुशंसा की है।

कुल 107 विद्यालयों ने अनुदान के लिए अपील की थी। इनमें 28 विद्यालयों के आवेदन नियमावली में निर्धारित शर्तें पूरी नहीं होने के कारण अस्वीकार किए गए। अन्य मामलों में भी समिति ने अलग-अलग कारण दर्ज करते हुए अपील मंजूर नहीं की। संबंधित विद्यालयों को फिलहाल अनुदान देने पर रोक रहेगी।

समीक्षा में सामने आया कि कई विद्यालयों में विधिवत गठित शासी निकाय नहीं था, जबकि कुछ के पास आवश्यक संख्या में कक्षाएं उपलब्ध नहीं थीं। कई संस्थानों ने स्थापना अनुमति मिलने के वर्षों बाद भी स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त नहीं की। राज्य सरकार स्थापना अनुमति या प्रस्वीकृति प्राप्त विद्यालयों को निर्धारित व्यवस्था के तहत अनुदान देती है।

दुमका के दो विद्यालयों को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया। एक विद्यालय में छह और दूसरे में तीन कक्षाएं उपलब्ध होने की बात कही गई, जिन्हें निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं माना गया। एक मामले में निरीक्षण के दौरान दर्ज नामांकन के अनुपात में विद्यार्थियों की उपस्थिति नहीं मिलने की बात रिपोर्ट में दर्ज थी।

सरायकेला-खरसावां के एक विद्यालय के संबंध में समिति ने शासी निकाय के विधिवत गठन पर आपत्ति दर्ज की। विभाग अब जैक से जवाब प्राप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। किसी पदाधिकारी की जवाबदेही या आगे की कार्रवाई का निर्णय जांच और स्पष्टीकरण के बाद ही होगा।