देवघर जिले के सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से तीन तक के बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक दक्षता जांचने का अभियान चल रहा है। ‘मेरा विद्यालय निपुण, मैं भी निपुण’ कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के 1,935 विद्यालयों को शामिल किया जाना है। अब तक 1,012 स्कूलों में आकलन पूरा हुआ है, जबकि 923 विद्यालयों में प्रक्रिया बाकी है।
कार्यक्रम में विशेष शिक्षक विद्यालयों का दौरा कर बच्चों की पढ़ने, लिखने और गणितीय सवाल हल करने की क्षमता परख रहे हैं। चित्रों तथा प्रश्नों वाले चार्ट की सहायता से विद्यार्थियों से सवाल पूछे जाते हैं। निर्धारित प्रश्नों का सही उत्तर देने वाले बच्चों के प्रदर्शन के आधार पर विद्यालयों को निपुणता की अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार के अनुसार, अभियान के माध्यम से हिंदी, अंग्रेजी और गणित जैसे प्रमुख विषयों में बच्चों की समझ और क्षमता का मूल्यांकन हो रहा है। इसका उद्देश्य प्राथमिक कक्षाओं में ही विद्यार्थियों की कमजोरियों की पहचान करना है, ताकि उनकी आगे की पढ़ाई के लिए जरूरी बुनियाद मजबूत की जा सके।
यह अभियान 26 अक्टूबर से शुरू हुआ है और 31 अक्टूबर तक चलना है। पूरी प्रक्रिया को पांच चरणों में बांटा गया है, जिनमें तीन चरण पूरे हो चुके हैं। इसमें देवघर, देवीपुर, करौं, मधुपुर, मारगोमुंडा, मोहनपुर, पालोजोरी, सारठ, सारवां और सोनारायठाढ़ी प्रखंडों के विद्यालय शामिल हैं।
देवघर प्रखंड में 126 विद्यालयों के आकलन के बाद 54 को गोल्ड, 16 को सिल्वर और 20 को ब्रॉन्ज श्रेणी मिली है। यहां 36 विद्यालयों के विद्यार्थी निर्धारित कक्षा-स्तरीय दक्षता तक नहीं पहुंच सके। मधुपुर में आकलित 125 विद्यालयों में से 73 और मारगोमुंडा के 75 विद्यालयों में से 63 निपुणता की निर्धारित श्रेणी से बाहर रहे।
मोहनपुर के 143 आकलित विद्यालयों में 76 और सारठ के 143 विद्यालयों में 86 के विद्यार्थी तय स्तर हासिल नहीं कर पाए। कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि प्रश्नोत्तरी और प्रतियोगिता आधारित गतिविधियों से बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ रही है। शेष विद्यालयों का आकलन पूरा होने के बाद जिले की समग्र स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।