झारखंड में 25 से 27 नवंबर तक शिक्षक आवश्यकता आकलन, हर पांच मिनट में अपलोड होगी केंद्र की तस्वीर

चौथे दौर के शिक्षक आवश्यकता आकलन के लिए पंजीकरण 4 से 16 नवंबर तक होगा। परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन और निगरानी की विस्तृत व्यवस्था रहेगी।

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रांची में शिक्षक आवश्यकता आकलन की निगरानी व्यवस्था का सांकेतिक दृश्य

रांची में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने 25 से 27 नवंबर तक प्रस्तावित चौथे दौर के टीचर नीड असेसमेंट के लिए निगरानी संबंधी निर्देश जारी किए हैं। सरकारी शिक्षकों की प्रशिक्षण जरूरतों के आकलन के लिए होने वाली इस परीक्षा के दौरान अधिकृत पदाधिकारी प्रत्येक पांच मिनट में केंद्र की तस्वीर इन्विजिलेशन पोर्टल पर अपलोड करेंगे। तस्वीरों में शिक्षकों की भागीदारी दिखाई देनी चाहिए।

मूल्यांकन में शामिल होने वाले शिक्षकों का पंजीकरण 4 से 16 नवंबर तक होगा। परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्र पर प्रत्येक शिक्षक की पहचान और पहचान-पत्र का सत्यापन किया जाएगा। बैठने की व्यवस्था ई-विद्यावाहिनी से जारी स्लिप के आधार पर होगी और शिक्षकों के बीच कम से कम चार फीट की दूरी रखी जाएगी।

निर्देशों के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य मूल्यांकन पूरा कर चुके शिक्षकों और अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों के बीच संपर्क रोकना है। प्रत्येक शिक्षक को परीक्षा के लिए केवल एक उपकरण इस्तेमाल करने की अनुमति होगी। अतिरिक्त उपकरण केंद्र के अधिकृत पदाधिकारी के पास जमा कराने होंगे।

दो घंटे के इस आकलन में कुल 60 अंकों के प्रश्न होंगे। प्रत्येक प्रश्न के लिए दो अंक निर्धारित किए गए हैं। इस दौर में माध्यमिक और प्लस टू विद्यालयों के शिक्षकों के लिए हिंदी तथा अंग्रेजी के अलग-अलग प्रश्नपत्र रखने का बदलाव भी किया गया है। सभी कक्षाओं के शिक्षक इस प्रक्रिया में भाग लेंगे।

टीचर नीड असेसमेंट का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी शिक्षक को किस स्तर और विषय में प्रशिक्षण की आवश्यकता है। मूल्यांकन से सामने आने वाली जरूरतों के आधार पर संबंधित शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण तय किया जाता है। राज्य में शिक्षकों के लिए सेवाकाल के दौरान 50 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है।

परिषद ने जिलों के पदाधिकारियों को व्यवस्था लागू कराने के निर्देश दिए हैं। पहचान सत्यापन, निर्धारित दूरी, उपकरणों की सीमा और नियमित तस्वीर अपलोड करने जैसे प्रावधान परीक्षा की निगरानी तथा पारदर्शी संचालन के लिए किए गए हैं। पंजीकरण पूरा करने वाले शिक्षकों को निर्धारित तिथियों पर आवंटित व्यवस्था के अनुसार मूल्यांकन में भाग लेना होगा।