झारखंड में इस बार बारिश की कमी खेती के लिए चिंता का विषय बनती दिख रही है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में सामान्य से 27 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसका असर 23 जिलों पर पड़ा है, जिससे खरीफ सीजन की खेती पर दबाव बढ़ा है।
सबसे अहम संकेत धान की रोपनी से जुड़ा है। पूर्वी सिंहभूम में धान की रोपनी केवल 50 प्रतिशत तक पहुंचने की बात सामने आई है। धान की खेती बारिश पर काफी निर्भर रहती है, इसलिए कम वर्षा का असर सीधे रोपनी की रफ्तार पर दिख रहा है।
राज्य के 23 जिलों के प्रभावित होने का मतलब है कि यह समस्या किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। बारिश की कमी व्यापक स्तर पर दर्ज की गई है और इससे खेतों में समय पर काम पूरा करने की चुनौती बढ़ सकती है।
पूर्वी सिंहभूम में आधी रोपनी का आंकड़ा किसानों और प्रशासन, दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। यदि बारिश की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो खेतों में बाकी रोपनी को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में नुकसान, राहत उपाय या किसी आधिकारिक निर्णय का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए स्थिति का आकलन बारिश की कमी, प्रभावित जिलों की संख्या और पूर्वी सिंहभूम में रोपनी के स्तर तक ही सीमित है।
कम बारिश से जुड़ी यह स्थिति कृषि गतिविधियों की निगरानी की जरूरत को रेखांकित करती है। आने वाले दिनों में बारिश और रोपनी की प्रगति से ही साफ होगा कि खरीफ खेती पर इसका असर कितना गहरा रहता है।