हजारीबाग समेत झारखंड के विभिन्न जिलों में शिक्षा परियोजना परिषद के जिला और प्रखंड स्तर पर कार्यरत संविदा कर्मियों ने नियमित वेतन नहीं मिलने की शिकायत की है। कर्मियों के मुताबिक, अधिकांश जिलों में जून 2026 के बाद भुगतान अटका हुआ है। इससे करीब 800 कर्मचारियों के सामने त्योहारों के समय आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।
कर्मियों का कहना है कि वेतन भुगतान की स्थिति सभी जिलों में एक समान नहीं है। कुछ जिलों में जुलाई और कुछ स्थानों पर अगस्त तक का वेतन मिला है। कई जगह जिला स्तर के कर्मचारियों को राशि मिलने के बाद भी प्रखंड स्तर पर तैनात कर्मियों का भुगतान लंबित बताया गया है।
कर्मचारियों ने भुगतान में देरी के पीछे एसएनए स्पर्श वित्तीय प्रणाली से जुड़ी प्रक्रिया का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, केंद्रांश मिलने के बाद भी भुगतान पूरा करने के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई शेष रहती है। इस कारण राशि उपलब्ध होने के बावजूद तकनीकी और प्रशासनिक अड़चन आने की बात कही जा रही है।
समग्र शिक्षा योजना की अवधि को लेकर भी कर्मियों ने स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात कही है। उनके अनुसार, योजना को पहले 31 मार्च 2026 तक स्वीकृति मिली थी और बाद में छह महीने का विस्तार देकर 30 सितंबर 2026 तक जारी रखा गया। अक्टूबर शुरू होने के बाद आगे के विस्तार की आधिकारिक सूचना नहीं मिलने से भुगतान प्रक्रिया प्रभावित होने का दावा किया गया है।
जिला और प्रखंड स्तर के ये कर्मी विद्यालयों में कार्यरत सीआरपी, बीआरपी और पारा शिक्षकों की उपस्थिति तथा अन्य विवरण तैयार कर राज्य स्तर पर भेजने जैसे काम करते हैं। उनका कहना है कि अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों का भुगतान जारी है, लेकिन संबंधित विवरण तैयार करने वाले परियोजना कर्मियों को अपने वेतन का इंतजार करना पड़ रहा है।
वेतन लंबित रहने से बैंक की किस्त, बच्चों की स्कूल फीस, राशन, मकान किराया, आवागमन और घरेलू खर्च संभालने में कठिनाई होने की बात कर्मचारियों ने कही है। प्रखंड स्तर के आदेशपाल, बीपीओ और अन्य कर्मियों ने राज्य परियोजना निदेशक से हस्तक्षेप कर जिला तथा प्रखंड स्तर के सभी परियोजना कर्मियों का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।