रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के तीन जूनियर इंजीनियरों को राहत देते हुए उन्हें 20 नवंबर 2012 से सहायक अभियंता (मैकेनिकल) के पद पर प्रोन्नति देने का आदेश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार को इस आदेश का पालन 12 सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया।
यह आदेश रॉबिन अजय सिंह, पंकज कुमार और संदीप कुमार की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। अदालत के अनुसार, तीनों इंजीनियर वर्ष 2012 में ही प्रोन्नति के पात्र थे, लेकिन विभागीय स्तर पर हुई देरी के कारण उन्हें उस समय इसका लाभ नहीं मिल सका।
हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के सचिव द्वारा 19 जनवरी 2026 को जारी आदेश भी निरस्त कर दिया। उस आदेश में इंजीनियरों की पिछली तिथि से प्रोन्नति देने की मांग नामंजूर कर दी गई थी। अब सरकार को प्रोन्नति के साथ उससे जुड़े सभी परिणामी वित्तीय और अन्य सेवा लाभ भी उपलब्ध कराने होंगे।
सुनवाई के दौरान विभाग ने प्रोन्नति का विरोध करते हुए लंबित सीबीआई जांच, वर्ष 2016 में लागू नई नियमावली और वित्तीय नियमों का उल्लेख किया। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और वर्ष 2012 में मौजूद परिस्थितियों के आधार पर कर्मचारियों के अधिकार का आकलन किया।
अदालत ने पाया कि जिस समय तीनों इंजीनियर प्रोन्नति के योग्य हुए थे, उस समय उनके विरुद्ध न तो कोई विभागीय कार्यवाही शुरू हुई थी और न ही आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इस आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि बाद में शुरू हुई प्रारंभिक जांच या बाद की नियमावली के कारण पहले से उपलब्ध प्रोन्नति के अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।
आदेश में राज्य सरकार से यह भी कहा गया है कि सहायक अभियंता पद पर 20 नवंबर 2012 से प्रोन्नति देने के बाद तीनों के कार्यपालक अभियंता (मैकेनिकल) पद पर प्रोन्नति के दावों पर नियमों के अनुसार विचार किया जाए। इस तरह अदालत का निर्देश तत्काल पदोन्नति लाभ के साथ उनकी आगे की सेवा-प्रगति के दावे को भी समेटता है।