सहायक आचार्य भाषा विषय का संशोधित परिणाम जारी, 1,265 अभ्यर्थी सफल

जेएसएससी ने प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त परीक्षा-2023 के भाषा विषय का पुराना परिणाम निरस्त कर संशोधित सूची जारी की है। आगे नियुक्ति और सेवा संबंधी निर्णय विभाग करेगा।

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रांची में सहायक आचार्य भर्ती के संशोधित परिणाम से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर

रांची में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त परीक्षा-2023 के तहत कक्षा छह से आठ के भाषा शिक्षक पद का संशोधित परिणाम जारी किया है। नई सूची में कुल 1,265 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है। आयोग ने भाषा विषय के पूर्व प्रकाशित परिणाम को निरस्त कर दिया है।

संशोधित परिणाम आरक्षण श्रेणी के अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी में शामिल करने से जुड़े न्यायिक विवाद के बाद जारी किया गया। आयोग ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 17 सितंबर 2026 के आदेश के अनुपालन में उठाया है। कुछ अभ्यर्थियों के परिणाम लंबित न्यायिक मामलों, रिक्तियों से जुड़े विवाद तथा जरूरी प्रमाणपत्र या दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण रोके गए हैं।

नई सूची में रांची जिले से सर्वाधिक 155 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। इसके बाद पलामू से 130, हजारीबाग से 66 और गढ़वा से 65 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। बोकारो और देवघर से 64-64, चतरा से 62, गोड्डा से 59, धनबाद से 58, सरायकेला-खरसावां से 56 तथा गुमला से 55 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं।

परिणाम में बदलाव के कारण पहले जारी सूची के आधार पर नियुक्त कुछ शिक्षकों की स्थिति प्रभावित हो सकती है। पुराने परिणाम में 1,100 से अधिक अभ्यर्थी सफल हुए थे और वे वर्तमान में कार्यरत हैं। संशोधित सूची में सफल घोषित हो चुके कार्यरत अभ्यर्थी फिलहाल अपने पद पर काम करते रहेंगे।

नई सूची में पहली बार सफल हुए अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जानी है। वहीं, पुराने परिणाम के आधार पर नियुक्त लेकिन संशोधित परिणाम में असफल रहे शिक्षकों की सेवा के संबंध में विभाग को फैसला करना होगा। इस कारण आयोग का परिणाम जारी होने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कुछ प्रश्न शेष हैं।

मामले से संबंधित अवमानना याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है। याचिका में पूर्व आदेश का पूर्ण अनुपालन नहीं होने का मुद्दा उठाया गया है। पिछली सुनवाई में सरकार और आयोग को चार सप्ताह के भीतर संशोधित परिणाम जारी करने का निर्देश मिला था, जबकि राज्य सरकार ने आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। आगे की स्थिति अदालत की सुनवाई और विभाग के निर्णय से स्पष्ट होगी।