झारखंड हाईकोर्ट को तीन नए न्यायाधीश मिले हैं। केंद्र सरकार ने शनिवार को मनोज प्रसाद, राम शर्मा और अखिल कुमार की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की। तीनों अभी अलग-अलग जिलों में प्रधान जिला न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। इन नियुक्तियों के बाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, हालांकि नौ पद अब भी खाली हैं।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 सितंबर को तीनों न्यायिक अधिकारियों को झारखंड हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाने की अनुशंसा की थी। अधिसूचना में शामिल मनोज प्रसाद गढ़वा, राम शर्मा डालटनगंज और अखिल कुमार साहिबगंज के प्रधान जिला न्यायाधीश रहे हैं।
अखिल कुमार का जन्म 6 जनवरी 1972 को पटना में हुआ था और उनकी शुरुआती शिक्षा भी वहीं हुई। उन्होंने 1999 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। उसी वर्ष अधिवक्ता के रूप में नामांकन के बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट में आपराधिक मामलों की वकालत की।
राम शर्मा का जन्म 7 जुलाई 1968 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने 1994 में दिल्ली से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और उसी वर्ष दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में आपराधिक मामलों की वकालत की। वह 26 मई 2012 को झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए थे।
मनोज प्रसाद का जन्म 1973 में देवघर में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और 1999 में बिहार स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए। उन्होंने देवघर जिला अदालत से वकालत की शुरुआत की थी।
मनोज प्रसाद 4 मई 2012 को झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए। तीनों न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति से हाईकोर्ट की न्यायिक क्षमता में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्वीकृत पदों में नौ रिक्तियां अभी शेष हैं।