झारखंड हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के प्रयास की दोषसिद्धि बदली, स्पष्ट और निकटवर्ती कृत्य को बताया जरूरी

झारखंड हाईकोर्ट ने 1999 के एक मामले में दुष्कर्म के प्रयास की दोषसिद्धि को महिला की लज्जा भंग करने के अपराध में बदलते हुए घर में घुसने की दोषसिद्धि बरकरार रखी।

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रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट भवन की प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने एक आपराधिक अपील पर फैसला देते हुए कहा है कि दुष्कर्म के प्रयास का अपराध साबित करने के लिए ऐसा स्पष्ट और निकटवर्ती कृत्य प्रमाणित होना जरूरी है, जो अपराध को अंजाम देने की दिशा में पर्याप्त रूप से आगे बढ़ चुका हो। अदालत ने मामले में धारा 376/511 के तहत दर्ज दोषसिद्धि को बदलकर धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने का अपराध माना।

जस्टिस पीके श्रीवास्तव की अदालत ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद यह निर्णय दिया। हाईकोर्ट ने घर में घुसने से संबंधित धारा 452 के तहत आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। आरोपी ने घाटशिला के अपर सत्र न्यायाधीश के 28 जुलाई 2006 के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दाखिल की थी। निचली अदालत ने उसे दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।

मामला 27 दिसंबर 1999 की रात का है। अभियोजन के अनुसार, पीड़िता अपने घर में सो रही थी और उसकी मां पास के कमरे में थी। रात करीब 12 बजे दरवाजा खुलने की आवाज पर उसकी नींद खुली। आरोप था कि कमरे में आए व्यक्ति ने उसके कपड़े उठाए और उसे पकड़ लिया। शोर सुनकर उसकी मां और आसपास के लोग पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया।

घटना को लेकर चाकुलिया थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल हुआ और निचली अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाहों के बयान कराए गए। आरोपी ने घटना से इनकार करते हुए राजनीतिक रंजिश के कारण झूठे मामले में फंसाए जाने का दावा किया था।

हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िता के बयान में आरोपी के कमरे में घुसने और उसे पकड़ने का उल्लेख है, लेकिन दुष्कर्म की कोशिश की दिशा में किसी विशिष्ट कृत्य का स्पष्ट प्रमाण नहीं है। अदालत के अनुसार, केवल परिस्थितियों या मंशा के आधार पर धारा 376/511 का अपराध स्थापित नहीं किया जा सकता। हालांकि, महिला पर हमले और उसके प्रति किए गए कृत्य को देखते हुए अदालत ने धारा 354 के तहत अपराध को सिद्ध माना।

सजा तय करते समय अदालत ने घटना को 26 वर्ष से अधिक समय बीतने, आरोपी का यह पहला अपराध होने और कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने पर विचार किया। उसकी सजा जेल में पहले बिताई गई करीब आठ महीने की अवधि तक सीमित कर दी गई। इस तरह दुष्कर्म के प्रयास की दोषसिद्धि बदली गई, जबकि घर में घुसने की दोषसिद्धि कायम रही।