तीन मांगों को लेकर 25 सितंबर को रांची में धरना देंगी आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं

झारखंड आंगनबाड़ी प्रदेश वर्कर्स यूनियन ने पोषाहार राशि के भुगतान, बाजार भाव के अनुसार दर तय करने और सेविका-सहायिकाओं को बेहतर सेवा लाभ देने की मांग उठाई है।

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रांची में प्रस्तावित धरने की घोषणा करतीं आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं

झारखंड आंगनबाड़ी प्रदेश वर्कर्स यूनियन ने अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर 25 सितंबर को रांची में एकदिवसीय धरना देने की घोषणा की है। यूनियन का कहना है कि पोषाहार की मौजूदा सरकारी दर पर तीन से छह वर्ष के बच्चों के लिए पका भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। संगठन ने सेविका-सहायिकाओं को चयनमुक्त करने की कथित चेतावनी पर भी आपत्ति जताई है।

यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष बालमुकुंद सिन्हा के मुताबिक खाद्य सामग्री की बाजार कीमत निर्धारित सरकारी दर से काफी अधिक हो चुकी है। उनका दावा है कि कई केंद्रों को पिछले आठ महीने से पोषाहार की राशि नहीं मिली है। ऐसी स्थिति में मामूली मानदेय पाने वाली सेविका और सहायिकाओं के लिए अपनी जेब से खर्च करना या उधार लेकर भोजन बनाना संभव नहीं रह गया है।

संगठन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर बकाया पोषाहार राशि का तत्काल भुगतान करने और बाजार मूल्य के आधार पर इसकी दर निर्धारित करने की मांग की है। तीसरी मांग सेविका-सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने तथा मानदेय, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ बढ़ाने से संबंधित है।

यूनियन के अनुसार चतरा, खूंटी और रांची समेत कई जिलों के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में एक सितंबर से तीन से छह वर्ष के बच्चों को पका भोजन नहीं दिया जा रहा है। संगठन ने यह भी दावा किया कि गढ़वा की समाज कल्याण पदाधिकारी ने 21 सितंबर को पत्र जारी कर पूरक पोषाहार नहीं चलाने वाले केंद्रों की सेविका-सहायिकाओं की चयनमुक्ति का प्रस्ताव भेजने को कहा है।

यूनियन ने कहा है कि चयनमुक्ति की कथित धमकी बंद नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी। संगठन ने पहले राजभवन के सामने धरने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उसके कार्यकारी अध्यक्ष के अनुसार जिला प्रशासन ने कूटे में प्रदर्शन का सुझाव दिया। प्रशासन का निर्णय नहीं बदलने पर मोरहाबादी मैदान में जुटने की बात कही गई है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार झारखंड में आईसीडीएस के तहत 38,957 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनसे करीब 38,027 सेविकाएं और 37,384 सहायिकाएं जुड़ी हैं, जबकि पूरक पोषण कार्यक्रम के लाभार्थियों की संख्या लगभग 24.04 लाख बताई गई है। प्रस्तावित धरना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उठाई गई मांगें केंद्रों के संचालन के साथ बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री महिलाओं को मिलने वाली पोषण सेवाओं से जुड़ी हैं।