धनबाद जिले के तोपचांची वन क्षेत्र में रामाकुंडा वन समिति की पांच महिलाएं वर्षों से बिना मानदेय जंगल की रखवाली कर रही हैं। समिति की अध्यक्ष मुंदरी देवी के नेतृत्व में सोमरी देवी, पूर्णिमा देवी, बबुनी देवी और एक अन्य महिला नियमित रूप से वन क्षेत्र की निगरानी करती हैं। उनका उद्देश्य पेड़-पौधों और वन्यजीवों को नुकसान से बचाना है।
महिलाओं की जिम्मेदारियों में जंगल में गश्त करना, पेड़ों की अवैध कटाई रोकना और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी वन विभाग को देना शामिल है। वे आसपास के ग्रामीणों को पेड़ों का महत्व भी समझाती हैं और पौधारोपण के लिए प्रेरित करती हैं। समिति से जुड़ी महिलाओं की उम्र 34 से 50 वर्ष के बीच बताई गई है।
इस काम के दौरान उन्हें विरोध और दुर्व्यवहार का सामना भी करना पड़ता है। इसके बावजूद उन्होंने निगरानी जारी रखी है। जुलाई से सितंबर के बीच करील काटने आए कई लोगों को महिलाओं ने रोका और वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद विभागीय कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर कटाई बंद कराई।
रामाकुंडा वन समिति का गठन वर्ष 2013 में 11 सदस्यों के साथ हुआ था। आर्थिक लाभ और मानदेय नहीं मिलने के कारण कुछ सदस्यों ने काम छोड़ दिया, लेकिन पांच महिलाओं ने अभियान जारी रखा। समिति के प्रयासों से बच्चों, युवाओं और दूसरे ग्रामीणों के बीच भी वन संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ने की बात सामने आई है।
रामाकुंडा के आसपास वन विभाग ने लगभग 25 हजार पौधे लगाए हैं। वनकर्मी शोभाराम महतो के अनुसार, समिति की महिलाएं समय-समय पर अवैध कटाई की सूचना देती हैं। उनके सहयोग से कई अवसरों पर कटाई रोकी गई और अवैध रूप से काटी गई लकड़ी बरामद की गई।
समिति को वन संरक्षण में योगदान के लिए वर्ष 2018 में राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक की ओर से सर्वश्रेष्ठ वन समिति का सम्मान और चार लाख रुपये का पुरस्कार मिला था। समिति से संबद्ध छात्राओं अंजली कुमारी और पायल ने सदस्यों के लिए मानदेय तथा आवश्यक सुविधाओं की जरूरत बताई है। धनबाद के डीएफओ विकास पालीवाल ने महिलाओं के काम को वन प्रमंडल के लिए उदाहरण बताते हुए सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।