रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देशों के अनुपालन का मामला गंभीरता से लिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने सरकार से कैमरों के लिए जारी टेंडर की अब तक की प्रगति पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत को बताया कि थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। अदालत ने अब इस प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति और टेंडर से जुड़ी प्रगति का ब्योरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को निर्धारित की गई है।
खंडपीठ ने तरुण महतो के जेल और चिकित्सा से जुड़े सभी रिकॉर्ड भी अगली सुनवाई में पेश करने को कहा है। न्याय मित्र अधिवक्ता रितेश कुमार महतो ने अदालत को बताया कि न्यायिक हिरासत में लिए जाने के बाद तरुण महतो की स्थिति ऐसी थी कि उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
यह मामला तरुण महतो की पत्नी द्वारा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजे गए पत्र के बाद सामने आया था। पत्र में आरोप लगाया गया था कि 19 नवंबर 2025 की रात पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद थाने में तरुण महतो के साथ मारपीट हुई और उनकी तबीयत बिगड़ गई। इन आरोपों पर अभी न्यायिक सुनवाई जारी है।
हाईकोर्ट ने पत्र का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया था। मौजूदा सुनवाई में अदालत ने हिरासत से संबंधित अभिलेखों के साथ थानों में निगरानी व्यवस्था की स्थिति पर भी ध्यान केंद्रित किया। मांगे गए रिकॉर्ड और सरकारी जवाब के आधार पर अगली सुनवाई में मामले की आगे समीक्षा होगी।
सुनवाई के दौरान पुलिस महानिदेशक की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट का आवेदन भी अदालत के सामने रखा गया। खंडपीठ ने बताए गए कारणों पर विचार करते हुए उन्हें अगले आदेश तक व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी। अब सरकार को 4 नवंबर की सुनवाई से पहले निर्देशित विवरण उपलब्ध कराना होगा।