पूर्वी सिंहभूम के दलमा वन्यजीव अभयारण्य में जल्द महुआ कैफे शुरू करने की तैयारी है। वन विभाग की इस पहल का उद्देश्य जंगलों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले महुआ के बेहतर उपयोग के साथ स्थानीय ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराना है।
प्रस्तावित कैफे में महुआ से तैयार लड्डू और कुकीज जैसे उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे पारंपरिक रूप से उपलब्ध वन उपज को उपयोगी खाद्य उत्पादों में बदलने तथा उनके लिए बाजार तैयार करने की दिशा में काम हो सकेगा। योजना में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को प्रमुखता दी गई है।
वन विभाग दलमा तक ही इस पहल को सीमित नहीं रखना चाहता। विभाग चरणबद्ध ढंग से झारखंड के सभी 11 वन्यजीव अभयारण्यों में महुआ कैफे खोलने की योजना पर काम कर रहा है। अलग-अलग अभयारण्यों में कैफे शुरू करने से पहले संबंधित महिलाओं को प्रशिक्षण देने की भी तैयारी है।
इस योजना के विस्तार के लिए बेतला में संचालित महुआ कैफे को आधार बनाया गया है। वहां की पहल के बाद अब दलमा समेत अन्य वन्यजीव अभयारण्यों में इसी स्वरूप को आगे बढ़ाने की योजना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दलमा में कैफे खोलने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
मुख्य वन संरक्षक, वन्यप्राणी एसआर नटेस के अनुसार, झारखंड के जंगलों में महुआ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और विभाग इसे स्थानीय रोजगार से जोड़ना चाहता है। प्रस्तावित व्यवस्था से ग्रामीण महिलाओं को महुआ आधारित वस्तुएं तैयार करने और उन्हें उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है।
योजना लागू होने पर दलमा का महुआ कैफे वन उपज के स्थानीय प्रसंस्करण और महिला आजीविका को एक मंच पर लाएगा। हालांकि, कैफे के उद्घाटन की निश्चित तारीख, प्रशिक्षण में शामिल होने वाली महिलाओं की संख्या और संचालन संबंधी विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।